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Sonebhadra: बड़ादेव सेवा समिति ट्रस्ट और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के संयुक्त ने आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं और सरकारी जमीन के नाम पर उनकी पुश्तैनी जमीन छीनी जा रही है।

सैकड़ो की संख्या में आदिवासी समाज ने कलेक्ट्रेट पहुचकर एडियम न्यायिक को ज्ञापन सौपा।

सोनभद्र। जनपद में आदिवासी समाज के जल,जंगल,जमीन और विस्थापन के मुद्दे को लेकर आज सोनभद्र कलेक्ट्रेट परिसर गरमा गया। बड़ादेव सेवा समिति ट्रस्ट और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के संयुक्त आह्वान पर सैकड़ों की संख्या में आदिवासी महिला-पुरुषों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि बिना ग्राम सभा की अनुमति के आदिवासी इलाकों में प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं और सरकारी जमीन के नाम पर उनकी पुश्तैनी जमीन छीनी जा रही है। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही और जमकर नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन को बड़े स्तर पर फैलाया जाएगा। आदिवासी जनआक्रोश का गवाह बना जब जल,जंगल,जमीन और संस्कृति के सवाल को लेकर सैकड़ों आदिवासी प्रदर्शन के लिए एकजुट हुए। बड़ादेव सेवा समिति ट्रस्ट और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में नगवां,दुद्धी,म्योरपुर सहित कई आदिवासी बहुल इलाकों से लोग पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सोनभद्र को पावर हब बनाने के नाम पर वर्षों से आदिवासियों को उनके गांवों से विस्थापित किया जा रहा है।बिना ग्राम सभा की सहमति के एनर्जी,खनन और औद्योगिक प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं,जिससे जंगल उजड़ रहे हैं और हजारों आदिवासी परिवार बेघर हो चुके हैं। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए लोगों ने साफ कहा कि जो जमीन सरकारी बताई जा रही है,वह दरअसल आदिवासियों की है और उस पर उनका संवैधानिक अधिकार है।महिलाओं ने भी प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कहा कि विस्थापन का सबसे बड़ा असर आदिवासी परिवारों और बच्चों पर पड़ रहा है। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने सोनभद्र जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर वनाधिकार अधिनियम के तहत दावों का निस्तारण,पांचवीं अनुसूची का प्रभावी क्रियान्वयन,ग्राम सभा की अनुमति के बिना प्रोजेक्ट पर रोक और आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों से वापस दिलाने की मांग की। इस दौरान एडीएम न्यायिक ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि ज्ञापन के माध्यम से रखी गई मांगों में जो मुद्दे जिला स्तर से निस्तारित किए जा सकते हैं,उन पर कार्रवाई की जाएगी और शेष मांगों को शासन स्तर पर भेजा जाएगा। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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