बॉलीवुड में दमदार! फिर क्यों निजी जिंदगी में हारे सईद जाफरी?
January 08, 2026
हिंदी सिनेमा में कई कलाकार आए लेकिन कुछ ही ऐसे हुए जो देश की सीमाओं से बाहर भी अपनी पहचान बना सके. सईद जाफरी उन्हीं चुनिंदा नामों में से एक थे. पर्दे पर उनकी सफलता जितनी बड़ी रही असल जिंदगी उतनी ही उलझी और दर्द से भरी रही.
आज अगर कोई बॉलीवुड एक्टर हॉलीवुड फिल्म कर ले तो उसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है. लेकिन साठ के दशक में जब विदेशी फिल्मों में भारतीय कलाकारों के लिए दरवाजे लगभग बंद थे तब सईद जाफरी ने ब्रिटिश और अमेरिकन सिनेमा में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई.
8 जनवरी 1929 को जन्मे सईद जाफरी को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था. बड़े होकर उन्होंने इसी शौक को अपना करियर बनाया. शुरुआत उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में इंग्लिश अनाउंसर के तौर पर की जहां उनकी आवाज को काफी पसंद किया गया. रेडियो के बाद सईद जाफरी थिएटर की दुनिया में आए. साल 1951 में उन्होंने फ्रैंक ठाकुरदास और बैंजी बेनेगल के साथ मिलकर ‘यूनिटी थिएटर’ की शुरुआत की. थिएटर ने उनके अभिनय को गहराई दी जिसका फायदा उन्हें फिल्मों में मिला.
फिल्म ‘गुरु’ से सिनेमा में कदम रखने वाले सईद जाफरी का करियर करीब छह दशक तक चला. उन्होंने 150 से ज्यादा फिल्मों में काम किया जिनमें हिंदी के साथ-साथ ब्रिटिश और अमेरिकन फिल्में भी शामिल रही हैं.हॉलीवुड में उन्होंने ‘द विल्बी कॉन्सपिरेसी’, ‘द मैन हू वुड बी किंग’, ‘स्फिंक्स’ और ‘अ पैसेज टू इंडिया’ जैसी फिल्मों में दमदार रोल किए. फिल्म ‘गांधी’ में उनका काम भी खूब सराहा गया और वे इंटरनेशनल अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने वाले पहले एशियाई कलाकार बने.
भारत में सईद जाफरी ने ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘चश्मे-बद्दूर’, ‘मासूम’, ‘दिल’, ‘हिना’ और ‘राम तेरी गंगा मैली’ जैसी फिल्मों से लोगों का दिल जीता. राज कपूर की फिल्मों ने उन्हें खास पहचान दिलाई.पर्दे पर इतनी सफलता के बावजूद सईद जाफरी की निजी जिंदगी खुशहाल नहीं रही. वे खुद मानते थे कि एक एक्टर के तौर पर तो वे सफल रहे लेकिन पति और पिता के रूप में खुद को नाकाम समझते थे.
उनकी पहली शादी मधुर जाफरी से हुई थी जो की एक्ट्रेस थी और बाद में लेखिका बनीं. थिएटर के दौरान हुई मुलाकात प्यार में बदली और 1958 में शादी हुई लेकिन वक्त के साथ दोनों के बीच मतभेद बढ़ते चले गए.कहा जाता है कि सईद जाफरी ब्रिटिश लाइफस्टाइल से काफी प्रभावित थे और अपनी पत्नी को भी उसी ढंग में देखना चाहते थे. इसी बात ने रिश्ते में खटास पैदा कर दी और तीन बेटियों के बावजूद 1966 में तलाक हो गया.तलाक के बाद सईद जाफरी एक विदेशी महिला के साथ रहने लगे लेकिन बाद में उन्हें अपने फैसले पर गहरा पछतावा हुआ. वे खुद को अपनी पहली पत्नी और बेटियों का दोषी मानते रहे.
कई इंटरव्यू में सईद जाफरी ने माना कि करियर की दौड़ में उन्होंने अपने रिश्तों को नजरअंदाज किया. उनकी जिंदगी ये सिखाती है कि शोहरत और कामयाबी के साथ रिश्तों को संभालना भी उतना ही जरूरी है.भले ही सईद जाफरी की निजी जिंदगी अधूरी रह गई हो लेकिन अपने शानदार अभिनय से उन्होंने जो छाप छोड़ी है. वो उन्हें हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रखेगी.
