बाराबंकी । संघर्ष, अभाव और सामाजिक सोच की बेड़ियों को तोड़कर बाराबंकी की बेटी डॉक्टर एकता नाग ने वह मुकाम हासिल किया है, जो आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन गया है। नगर फतेहपुर के काजीपुर वार्ड-3 की निवासी डॉक्टर एकता नाग वर्तमान में जर्मनी के हाइडेलबर्ग में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं और जर्मन सरकार की प्रतिष्ठित अलेक्जेंडर वान हमबॉल्ट फेलोशिप के अंतर्गत शोध कर रही हैं।
आर्थिक तंगी में पली-बढ़ी डॉक्टर एकता बताती हैं कि उनके पिता के सपने और उनके शब्द ही जीवन की सबसे बड़ी ताकत बने। पिता अक्सर कहते थे “पढ़ाई कर लो, नहीं तो दूसरों के घर बर्तन धोने पड़ेंगे।” यही वाक्य आगे चलकर उनके लिए प्रेरणा बन गया। जवाहर नवोदय विद्यालय, बाराबंकी में चयन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इसके बाद उन्होंने आईटी कॉलेज से बीएससी, क्रिश्चियन कॉलेज लखनऊ से एमएससी तथा आईआईएसईआर तिरुपति से पीएचडी की पढ़ाई पूरी की।2014 में पिता के निधन के बाद भी कठिन परिस्थितियों में उन्होंने हार नहीं मानी। पढ़ाई के साथ-साथ शिक्षण कार्य कर परिवार का सहारा बनीं। इस सफलता में उनकी माता, भाई और नवोदय विद्यालय के शिक्षकों का मार्गदर्शन अहम रहा।डॉक्टर एकता का कहना है कि यदि बेटियों में जुनून और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। शिक्षा केवल नौकरी पाने का साधन नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता का माध्यम है। उन्होंने देश की बेटियों से शिक्षित और आत्मनिर्भर बनने की अपील करते हुए कहा कि एक शिक्षित बेटी से पूरा समाज आगे बढ़ता है।आज जिले की यह बेटी अपने पिता के सपनों को साकार कर देश और गांव दोनों का नाम रोशन कर रही है।
