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अमेरिका भारत को लौटाएगा 3 प्राचीन कांस्य मूर्तियां


स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने घोषणा की है कि वह भारत सरकार को तीन दुर्लभ प्राचीन कांस्य मूर्तियां वापस करेगा। गहन जांच और विस्तृत प्रोवेनेंस रिसर्च के बाद यह साबित हुआ कि इन मूर्तियों को तमिलनाडु के मंदिरों से चुराया गया था। यह कदम सांस्कृतिक धरोहर की वापसी पर बढ़ते वैश्विक प्रयासों का हिस्सा है।

स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने घोषणा की है कि वह भारत सरकार को तीन दुर्लभ प्राचीन कांस्य मूर्तियां वापस करेगा। गहन जांच और विस्तृत प्रोवेनेंस रिसर्च के बाद यह साबित हुआ कि इन मूर्तियों को तमिलनाडु के मंदिरों से चुराया गया था। यह कदम सांस्कृतिक धरोहर की वापसी पर बढ़ते वैश्विक प्रयासों का हिस्सा है।

भारत सरकार ने सहमति दी है कि शिव नटराज मूर्ति को दीर्घकालिक ऋण (लॉन्ग-टर्म लोन) पर म्यूजियम में रखा जाए। इस व्यवस्था से म्यूजियम को मूर्ति की पूरी कहानी, उत्पत्ति, चोरी और वापसी को सार्वजनिक रूप से साझा करने की अनुमति मिलेगी। यह मूर्ति अब 'दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और हिमालय क्षेत्र में ज्ञान की कला' नाम की प्रदर्शनी में प्रदर्शित रहेगी। बाकी 2 मूर्तियां, सोमस्कंद और संत सुंदरार विद परवई भारतीय दूतावास के माध्यम से भारत भेजी जाएंगी। म्यूजियम और भारतीय दूतावास इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए निकट संपर्क में हैं।

यह घटना स्मिथसोनियन के दक्षिण एवं दक्षिणपूर्व एशियाई कला संग्रह के सिस्टेमैटिक रिव्यू का हिस्सा है, जिसमें सांस्कृतिक संपदा की नैतिक जिम्मेदारी पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी वापसियां भारत की सांस्कृतिक विरासत को बहाल करने में महत्वपूर्ण हैं और वैश्विक स्तर पर लूटे गए अवशेषों की वापसी की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

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