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सिद्धारमैया v/s शिवकुमार! क्या ढाई साल पूरे होने पर कर्नाटक को मिलेगा नया मुख्यमंत्री


कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ कथित 2.5 साल के पावर शेयरिंग समझौते से साफ इनकार कर दिया है. विधानसभा में शुक्रवार को उन्होंने कहा कि ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ था. यह चार दिनों में दूसरी बार है जब सिद्धारमैया ने अपना पूरा कार्यकाल पूरा करने का इरादा जताया है.

2023 में कांग्रेस की जीत के बाद CM पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच विवाद हुआ था. उस समय रिपोर्ट्स आई थीं कि दोनों के बीच अनौपचारिक समझौता हुआ था कि पांच साल का कार्यकाल 2.5-2.5 साल में बांटा जाएगा. सिद्धारमैया को पहले CM बनाया गया, लेकिन अब 2.5 साल की अवधि पूरी होने पर शिवकुमार गुट बदलाव की मांग कर रहे हैं.

शुक्रवार को विधानसभा में सिद्धारमैया ने कहा, 'मैं पहले भी 5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुका हूं और अब फिर CM बना हूं. मेरे हिसाब से हाईकमान मेरे पक्ष में है. 2.5 साल में बांटने का कोई फैसला नहीं हुआ था.'

16 दिसंबर को भी उन्होंने विधानसभा में कहा था, 'अभी भी कहता हूं- मैं मुख्यमंत्री हूं और मुख्यमंत्री ही रहूंगा.' इस महीने तीसरी बार उन्होंने फैसला कांग्रेस हाईकमान पर छोड़ा है.

2 दिसंबर को पार्टी की ओर से एकता दिखाने के लिए दो 'पावर ब्रेकफास्ट' मीटिंग के बाद उन्होंने कहा था कि गांधी परिवार के निर्देश पर ही पद छोड़ेंगे.

डीके शिवकुमार का दावा इसी कथित 2023 समझौते पर टिका है. हाल में कुछ मीटिंग्स के बाद सूत्रों ने बताया कि बदलाव की बात चल रही है. शिवकुमार गुट अप्रैल 2026 से बदलाव चाहता है, जबकि सिद्धारमैया गुट पूरा कार्यकाल खत्म करने के बाद 2028 चुनाव में शिवकुमार को समर्थन देने की बात कह रहा है. इससे वोक्कालिगा और अहिंदा वोट बैंक को एकजुट करने की योजना है.

गुरुवार रात सीनियर मंत्री सतीश जरकीहोली के घर डिनर मीटिंग हुई, जिसमें सिद्धारमैया, होम मिनिस्टर जी परमेश्वर और शिवकुमार के करीबी लोग शामिल थे, लेकिन शिवकुमार को आमंत्रित नहीं किया गया. शिवकुमार ने इसे सामान्य बताया और कहा, 'डिनर करने में क्या गलत है? वे डिनर करें, यह खुशी की बात है.'

शिवकुमार गुट के विधायक दिल्ली जाकर मामले में दखल की मांग कर चुके हैं. पार्टी ने सिद्धारमैया का समर्थन किया है, लेकिन शिवकुमार को भी कुछ उम्मीद दी है. दोनों नेताओं से एकता दिखाने को कहा गया है. यह विवाद कर्नाटक कांग्रेस में जारी है, लेकिन पार्टी सरकार चलाने और जनता के काम पर फोकस करने की कोशिश कर रही है.

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