लखनऊ। नशीला कफ सिरप के सिंडीकेट का एक हिस्सेदार बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह है। जिसकी तलाश में यूपी एसटीएफ की टीमों ने रविवार को कई जगहों पर छापामारी की। हालांकि वह हाथ नहीं लग सका।
बर्खास्त सिपाही की लोकेशन जौनपुर के बाहुबली के घर के आसपास मिलने के बाद एक टीम को भेजा गया, लेकिन हाथ नहीं लगा। अब एसटीएफ आलोक सिंह के खिलाफ अदालत से गैर-जमानती वारंट लेने की तैयारी में है, जिसके बाद पेश नहीं होने पर उसकी चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा। आलोक सिंह नशीले कफ सिरप सिंडीकेट के मास्टरमाइंड माना जा रहा है, वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल और अमित सिंह टाटा के साथ मिलकर कारोबार कर रहा था।
दरअसल तीनों को जौनपुर का ही एक बाहुबली संरक्षण दे रहा था। बाहुबली की तीनों के साथ गहरी घनिष्ठता के बावजूद एसटीएफ अभी तक उससे पूछताछ नहीं कर सकी है। जिसे लेकर तमाम सवाल उठने लगे हैं?, पूर्वांचल के अंडरवर्ल्ड में भी इस बात की चर्चा है कि बाहुबली के तीनों के साथ कारोबारी रिश्ते भी थे। खासकर अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह सबसे करीबियों में शुमार किए जाते थे।
बाहुबली का वरदहस्त मिलने पर आलोक सिंह ने चंद वर्षों में करोड़ों रुपए की संपत्तियां जुटाई है। एसटीएफ उसकी संपत्तियों का भी पता लगा रही है, ताकि गिरफ्तार अथवा पेश नहीं होने पर कुर्की की कार्रवाई की जा सके.....।
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