भारत में मुस्लिम यूनिवर्सिटी वीसी बनाना मुश्किल है-मौलाना अरशद मदनी
November 22, 2025
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद और देश में मुसलमानों की स्थिति पर बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि मौजूदा हालात ऐसे हैं कि भारत में किसी भी यूनिवर्सिटी में मुस्लिम वाइस चांसलर का बनना लगभग नामुमकिन हो गया है और अगर कोई बन भी जाए तो उसका अंजाम वही होगा जो समाजवादी नेता आजम खान के साथ हुआ था- जेल.
मौलाना मदनी दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में बोल रहे थे, जो जमीयत के संस्थापकों में से एक मुफ्ती किफायतुल्लाह देहलवी की जिंदगी और उनकी विरासत पर केंद्रित था. उन्होंने अपने संबोधन के दौरान अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके मालिक से जुड़े विवाद का मुद्दा उठाया और कहा कि सिस्टम मुसलमानों को आगे बढ़ने नहीं देना चाहता.
अपने संबोधन में मौलाना मदनी ने कहा, “अल-फलाह यूनिवर्सिटी का मालिक जेल में पड़ा हुआ है. कब तक पड़ा रहेगा, कोई नहीं जानता. यह कैसी न्याय प्रणाली है कि किसी को लगातार जेल में रखा जाए जबकि केस अभी पूरी तरह साबित भी न हुआ हो.” उन्होंने आगे कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी मुसलमानों को शिक्षा, नेतृत्व और प्रशासनिक ढांचे में आगे बढ़ने से रोका जा रहा है.
मदनी ने वैश्विक उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया भर में मुसलमान बड़ी जिम्मेदारियों पर हैं, उन्होंने कहा, “आज एक मुसलमान ममदानी न्यूयॉर्क का मेयर बन सकता है. सादिक खान लंदन का मेयर बन सकता है, लेकिन हिंदुस्तान में किसी यूनिवर्सिटी का मुस्लिम वाइस चांसलर नहीं बन सकता और अगर बनेगा तो आजम खान की तरह जेल जाएगा.” उनके इस बयान को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संदर्भ में जोड़कर देखा जा रहा है, जहां हाल ही में कई कानूनी जांचें और गिरफ्तारी के मामले सामने आए हैं.
मौलाना मदनी ने कहा, "आजादी के बाद से ही सरकारें मुसलमानों को कमजोर करने की कोशिश में लगी हैं. सरकारें चाहती हैं कि मुसलमानों के पैरों से जमीन छीन ली जाए और काफी हद तक छीन भी ली गई है. आज मुसलमानों का हौसला पस्त कर दिया गया है.” उन्होंने कहा कि मुसलमानों में नेतृत्व की कमी का आरोप गलत है. यदि दुनिया के बड़े शहरों में मुसलमान मेयर बन सकते हैं, तो भारत में नेतृत्व क्यों नहीं उभरने दिया जा रहा?
