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एक्सरसाइज त्रिशूल: अब कराची तक घुसकर मारेगी भारतीय सेना


भारत ने अपने सैन्य इतिहास में एक साहसिक अध्याय जोड़ा, जब गुजरात के माधवपुर बीच पर ‘एक्सरसाइज त्रिशूल’ के दौरान भारतीय सेना के टैंक पहली बार सीधे समुद्र से उतारे गए. समुद्री लहरों और बख़्तरबंद दहाड़ के इस मेल ने यह साफ कर दिया कि भारतीय थलसेना अब सिर्फ ज़मीन तक सीमित नहीं बल्कि समुद्र को भी अपनी नई युद्धभूमि बना चुकी है.

यह अभ्यास केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की बदलती सैन्य सोच और बढ़ती सामरिक क्षमता का प्रतीक था. लैंडिंग क्राफ्ट मैकेनाइज़्ड (LCM) के माध्यम से भारी टैंक और एक इन्फैंट्री प्लाटून को समुद्र से तट पर सफलतापूर्वक उतारना दिखाता है कि भारतीय सेना अब तटीय इलाकों में भी तेज़, अप्रत्याशित और निर्णायक अभियान चलाने में सक्षम हो चुकी है. यह क्षमता किसी भी संभावित विरोधी के लिए बड़ी चुनौती साबित होती है. खासतौर पर पाकिस्तान के लिए, जिसका सामरिक और आर्थिक केंद्र कराची तट के पास स्थित है.

अभ्यास की समीक्षा लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और एयर मार्शल नागेश कपूर ने की. इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना की व्यापक तैयारी पर विश्वास जताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की चुनौती अगर आए. चाहे वो रेगिस्तान का इलाका हो, या रण या क्रीक तक का हो, दक्षिणी कमान हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उनकी यह टिप्पणी स्पष्ट संकेत देती है कि भारतीय सेना अब मल्टी-टेरेन और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा चुकी है.

समुद्र में नौसेना की मौजूदगी, हवा में वायुसेना की निगरानी और तट पर भारतीय सेना के टैंकों की शक्ति इन तीनों का यह संयुक्त स्वरूप ‘त्रिशूल’ को एक अभूतपूर्व सैन्य अभ्यास बनाता है. इसने दिखाया कि भारत की तीनों सेनाएं अब एकीकृत अभियान चलाने में पहले से कहीं अधिक सक्षम हैं.

अभ्यास के बाद पाकिस्तान में इस बात को लेकर गंभीर चर्चा है कि समुद्र के रास्ते भारी भारतीय टैंकों का उतरना कराची के सुरक्षा गणित को कैसे प्रभावित करेगा. वहीं भारत के लिए यह अभ्यास संयुक्तता, गति और आधुनिक युद्ध की नई जरूरतों के अनुरूप तैयारियों का स्पष्ट संकेत है.

‘त्रिशूल’ ने इस बात को स्थापित कर दिया है कि भारत की रक्षा सोच अब सीमाओं से परे जाकर समुद्री आयामों को भी निर्णायक शक्ति में बदल रही है. अगर कभी परिस्थितियां मांगें तो समुद्र अब भारतीय टैंकों के लिए बाधा नहीं बल्कि एक नया शक्तिशाली आक्रामक मार्ग होगा.

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