इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने सपा नेता आजम खान से जुड़े सभी केस की सुनवाई से खुद को किया अलग
November 22, 2025
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस समीर जैन ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म खान से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसमें 2016 का यतीमखाना (अनाथालय) केस भी शामिल है। जस्टिस जैन को दोपहर में मामले की सुनवाई करनी थी, लेकिन कार्रवाई शुरू होने से पहले उन्होंने खुली कोर्ट में कहा कि वह अब आज़म खान से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं कर पाएंगे। उन्होंने खुद को अलग करने का कोई कारण नहीं बताया।
जानकारी के मुताबिक, 2016 यतीमखाना बेदखली प्रकरण की सुनवाई ने उस समय अप्रत्याशित मोड़ ले लिया, जब मामला अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने के बावजूद न्यायमूर्ति समीर जैन ने स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। यह फैसला अदालत में उपस्थित सभी अधिवक्ताओं के समक्ष सुनाया गया। सुनवाई के दौरान सह-आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एफ.ए. नक़वी और अधिवक्ता सैयद अहमद फैज़ान उपस्थित थे, जबकि पूर्व सांसद आजम खान और सह-आरोपी वीरेन्द्र गोयल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आई. जाफरी, अधिवक्ता शाश्वत आनंद और शशांक तिवारी मौजूद रहे।
स्थिति को गंभीर बनाते हुए न्यायमूर्ति समीर जैन ने न केवल इस मामले से खुद को अलग किया, बल्कि पूर्व सांसद मोहम्मद आजम खान से जुड़े सभी लंबित मामलों को भी अपनी कोर्ट से रिलीज़ कर दिया। यह दुर्लभ होता है कि एक जज एक ही व्यक्ति से जुड़े सभी मामलों से खुद को एक साथ अलग करे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट के अंतिम निर्णय पर लगी रोक (stay on the trial judgement) अगली तारीख तक प्रभावी रहेगी। इससे यह सुनिश्चित हो गया कि ट्रायल कोर्ट किसी भी परिस्थिति में फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं सुना पाएगा।
न्यायमूर्ति जैन के केस से अलग होने के बाद अदालत ने निर्देश दिया है कि मामला अब उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा और इसके लिए माननीय मुख्य न्यायाधीश से नामांकन (nomination) प्राप्त किया जाएगा। इसका अर्थ है कि अब यह केस किस बेंच को मिलेगा, इसका निर्णय चीफ जस्टिस करेंगे।
यह मामला ट्रायल कोर्ट के 30 मई 2025 के आदेश को चुनौती देने से संबंधित है, जिसमें अभियोजन गवाहों विशेषकर वक्फ बोर्ड चेयरमैन ज़फर अहमद फ़ारूकी को दोबारा बुलाने और कथित बेदखली की वीडियोग्राफी को रिकॉर्ड में शामिल करने की मांग खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह वीडियो उनकी घटनास्थल पर अनुपस्थिति सिद्ध कर सकता है और निष्पक्ष सुनवाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चूंकि यह मामला 12 एफआईआर पर आधारित है, जिन्हें बाद में मिलाकर स्पेशल केस नं. 45/2020 बनाया गया था और इसमें राजनीतिक रूप से चर्चित पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान मुख्य आरोपी हैं। यह मुकदमा 2019 में रामपुर के कोतवाली थाने में दर्ज 12 एफआईआर पर आधारित है। जिनमें डकैती, आपराधिक षड्यंत्र और घर में अनधिकृत प्रवेश जैसे आरोप शामिल हैं। सभी मामलों को आठ अगस्त 2024 को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) रामपुर ने एकल मुकदमे में जोड़ा था।
