आतंकी डॉक्टरों को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे, जानें धमाके के बाद आरिफ का क्या था प्लान
November 16, 2025
दिल्ली ब्लास्ट की जांच में जुटी एटीएस और एनआईए को बड़ी सफलता मिली है. जांच एजेंसियों ने जिस ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी नेटवर्क की तलाश शुरू की थी, अब उसकी कईं परतें खुलने लगी हैं. मामले में पकड़े गए डॉक्टर शाहीन सईद, डॉक्टर आरिफ और डॉक्टर मुजम्मिल के बीच गहरे संपर्क का खुलासा हुआ है.
सूत्रों के अनुसार, फॉरेंसिक जांच में तीनों के बीच 39 वॉयस कॉल, 43 व्हाट्सऐप कॉल और 200 से अधिक मैसेज मिले हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि तीनों लंबे समय से संपर्क में थे और धमाके की साजिश रचने के बाद लगातार बातचीत कर रहे थे. एजेंसियों ने 25 डिलीटेड मैसेज भी रिकवर किए हैं, जिनमें साजिश की गहराई से जुड़े अहम राज छिपे होने की संभावना है.
कानपुर के अशोक नगर स्थित फ्लैट से गिरफ्तार डॉ. आरिफ के कमरे से एजेंसियों को पैक्ड बैग, कपड़े और जरूरी सामान मिले. इससे साफ है कि वह गिरफ्तारी से पहले शहर छोड़ने वाला था. सूत्रों का कहना है कि जैसे ही फरीदाबाद में डॉक्टर शाहीन की गिरफ्तारी की खबर आरिफ को मिली, वह अपनी बारी आने का अंदेशा लगाकर भागने की तैयारी में लग गया था. सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते उसे पकड़ लिया.
तलाशी के दौरान एजेंसियों को आरिफ के पास से दो आईफोन और एक की-पैड फोन मिला है. नया आईफोन उसने 27 अक्टूबर को ही खरीदा था. जांच में पता चला है कि उसने पुराने कॉन्टैक्ट्स और डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए नया फोन लिया था. लैपटॉप से भी कई संदिग्ध फाइलें मिली हैं, जिनमें दस्तावेज, मैप्स और चैट लॉग शामिल हो सकते हैं इनकी तकनीकी जांच जारी है.
खुफिया एजेंसियां अब कानपुर के चमनगंज और बेकनगंज क्षेत्रों की भी जांच कर रही हैं. सूत्रों के अनुसार शाहीन के भाई डॉक्टर परवेज और उसके रिश्तेदारों की इन इलाकों में मजबूत पकड़ है. जानकारी है कि ये लोग धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रहते थे, जहां बड़ी संख्या में बाहरी लोग भी शामिल होते थे. अब एजेंसियां इन बाहरी व्यक्तियों की भी पहचान कर उनके बैकग्राउंड की जांच कर रही हैं.
यह मामला इसलिए भी ज्यादा गंभीर है क्योंकि इसमें डॉक्टर जैसे पढ़े-लिखे प्रोफेशनल शामिल हैं. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल है, जो सामान्य दिखने वाले लोगों की आड़ में बड़ी साजिश रचता है. IMA ने आतंकी डॉक्टर शाहीन की सदस्यता समाप्त कर दी है. वहीं, कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के शिलापट से शाहीन सईद का नाम सफेद पट्टी लगाकर हटा दिया गया है.
जांच एजेंसियां अब तक 2000 से अधिक मेडिकल छात्रों के दस्तावेज खंगाल चुकी हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकता है. एटीएस और जांच एजेंसियां डॉक्टर आरिफ से लगातार पूछताछ कर रही हैं. फंडिंग, विदेशी लिंक, ट्रेनिंग और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की जानकारी निकालने पर फोकस है. अधिकारियों का कहना है कि यह मॉड्यूल उत्तर भारत में आतंक की नई चुनौती बन सकता था, लेकिन समय रहते इसका बड़ा हिस्सा पकड़ में आ गया.
