- अतिपिछड़ों और कर्पूरी की अनदेखी करने वाले सपा बसपा तेजस्वी की पोल खुली।
- पीडीए बना लें या यूपीए अतिपिछड़ों को जन संख्या अनुपात में हिस्सेदारी नहीं देंगे
- जब कर्पूरी जी के समाज सहित सभी अतिपिछड़ों की अनदेखी करने का खामियाजा भुगतना पड़ा।
लखनऊ/ पटना ( विधान केसरी) हालांकि सियासत में कोई किसी का सगा नहीं होता जो ज्यादा नजदीक होता है वहीं सबसे बड़ा विरोधी साबित होने में देर नहीं लगती तभी तो बिहार चुनाव में एनडीए की बंपर जीत का श्रेय लेने वालों में होड़ मच गई है लेकिन बिहार चुनाव में भी उत्तर प्रदेश की तरह नींद का समय छोड़ दें हंसते हंसते दूसरों को भी अपना बनाने के माहिर केशव प्रसाद मौर्य का जादू बिहार की जनता के ऐसा सिर चढ़कर बोला कि देश में खुद को बड़ा नेता समझने की गलतफहमी पालें एक से एक बड़े नेता धराशाई हो गए और तो और मोदी और मौर्य की बदौलत नितिश कुमार की डूबती साख भी बची रह गई। इस चुनाव में भी जहां लालू नितिश अखिलेश मायावती के कर्पूरी और ओबीसी प्रेम की पोल खुल गई वहीं यह भी साबित हो गया कि अब दलित पिछड़ा लकीर का फकीर नहीं रहा अपने झूठे इगो के चलते जहां चन्द्रशेखर मायावती अखिलेश राजभर संजय निषाद अनुप्रिया किसी को बराबरी में खड़ा नहीं करते वहीं केशव प्रसाद मौर्य को गरीबों दलितों आदिवासियों अतिपिछड़ों को अपना बनाने में महारथ हासिल है लेकिन भाजपा किसी अतिपिछड़े को मुख्यमंत्री बनाऐगी भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि जब उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत अतिपिछड़ों की उम्मीद पर पानी फेर योगी जी को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है तो फिर बिहार की क्या बिसात है। खैर बिहार में कौन सी एम बनेगा यह तो संघ जाने या प्रधानमंत्री गृहमंत्री फिलहाल बिहार सीएम का पद उत्तर प्रदेश का विधान सभा चुनाव परिणाम भी तय करेगा।
हालांकि इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि देश के प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा के छोटे बड़े नेताओं मंत्रियों विधायकों सांसदों यहां तक अधिकांश कार्यकर्ताओं ने पूरे चुनाव बिहार में डेरा डाले रखा और जो जिससे बन पड़ा वह किया लेकिन अपना पहला चुनाव जीतते ही अतिपिछड़ों में खुशमिजाज व्यवहार बनाने में सफल रहे केशव प्रसाद मौर्य की कोई पिछड़ा नेता लोकप्रियता कम नहीं कर सका उत्तर प्रदेश सरकार में रहते हुए भी भले अतिपिछड़ों से कुंठा रखने वाले भाजपाइयों गैर भाजपाइयो ने उन्हें पछाड़ने का ही नहीं उनके बढ़ते कदम रोकने का भरसक प्रयास किया और सरकार के चलते ही उन्हें उनकी विधानसभा से हराने में कामयाबी हासिल की लेकिन हीरे की परख रखने वाले नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कभी उनका क़द कम नहीं होने दिया हारने और तमाम रोढे लगने के बावजूद उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री से नीचे नहीं आने दिया यही कारण रहा कि स्टूल मंत्री कठपुतली जैसे शब्दों से नवाजे जाने के बावजूद केशव मौर्य ने अपने व्यवहार की बदौलत ओबीसी लोकप्रियता में कमी नहीं आने दी इस लिए यह दावा करने में संकोच नहीं किया जा सकता कि केशव प्रसाद मौर्य के अलावा पूरी भाजपा में कोई उनसे लोकप्रिय ओबीसी नेता नहीं है।
इसे जौहरी की परख ही कहा जाएगा कि बिहार चुनाव घोषित होते ही भाजपा हाईकमान ने सहप्रभारी बनाकर उन्हें चुनाव की कमान सौंप दी जिस कारण उन्होंने चुनाव खत्म होने तक उत्तर प्रदेश का रूख नहीं किया और ताबड़तोड़ बैठक कर अतिपिछड़ों को ही नहीं सभी वंचितों को यह बताने में कामयाब रहे कि बिहार की जंगली व्यवस्था में केवल भाजपा ही जनता को सुरक्षित रख सकतीं हैं उन्होंने ताबड़तोड़ चुनावी सभाओं के बीच जहां ओबीसी के जिम्मेदार लोगों का भरोसा बनाए रखा वहीं गैर भाजपाइयो ने लम्बे समय तक बिहार को जंगलराज बनाकर रखने के दोषियों को ही सत्ता सौंपने का संदेश देकर भाजपा की राह आसान कर दी, खैर बिहार की जीत में जहां सभी भाजपाइयों ने सत्ता प्राप्ति का लक्ष्य बनाकर चुनाव लड़ा वहीं भाजपा विरोधी लोग चुनाव आयोग को दोष देकर चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री घोषित कर जनसभाएं करते रहे कुल मिलाकर भाजपा सहित संघ या सामाजिक संगठनों के लोग बिहार की बंपर जीत पर भले ही किसी के सिर सेहरा बांधते रहें लेकिन यह सोलह आने सच है की उत्तर प्रदेश में ओबीसी वोटों पर पकड़ बरकरार रखने वाले केशव प्रसाद मौर्य न सिर्फ भाजपा बल्कि नितिश चिराग़ मांझी की साख भी बरकरार रख केंद्र सरकार को नितिश कुमार के दबाव से बाहर निकालने में कामयाब रहे ।अब सरकार उत्तर प्रदेश की तरह भाजपा फिर उन्हें इग्नोर करती है या बड़ा इनाम देती है यह तो भाजपा जाने या प्रधानमंत्री गृहमंत्री की जोड़ी फिलहाल इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि अकेले केशव प्रसाद मौर्य केंद्र और बिहार सरकार में तमाम कमियों का प्रचार होने के बावजूद भाजपा और एनडीए को बंपर सीटें दिलाने में कामयाब रहे हैं हालांकि ओबीसी विरोधी मीडिया हो या नेता यह कहते नज़र आएंगे कि बिहार में नितिश, मांझी योगी, पीएम, एच एम, सहित फला फला भाजपाई का जादू सिर चढ़कर बोला और केशव प्रसाद मौर्य के सिर जीत का सेहरा बांधने वाला ढूंढे नहीं मिलेगा लेकिन इस चुनाव ने साबित कर दिया है कि केशव के अलावा किसी भी भाजपाई की निष्ठा पर शक किया जा सकता है लेकिन केशव प्रसाद मौर्य भाजपा का केवट बना रहेगा।
बिहार चुनाव में अतिपिछड़ों के कथित प्रेमियों की पोल खुलीउत्तर प्रदेश सहित बिहार बंगाल मध्यप्रदेश हरियाणा उत्तराखंड राजस्थान दिल्ली में अतिपिछड़ों के हक़ और सम्मान की बात करने वाले सभी दलों की पोल खोल दी है वहीं भाजपा ने भले ही कर्पूरी जी की जाति को एक टिकट न दिया हो लेकिन प्रधानमंत्री समस्तीपुर में कर्पूरी जी माल्यार्पण कर कुछ तो संदेश देने में कामयाब रहे लेकिन सपा बसपा कांग्रेस नितिश लालू तेजस्वी मांझी चिराग़ ने साफ कर दिया कि हम अतिपिछड़ों के अधिकार देने का कितना भी दांवा करते रहे लेकिन उन्हें पुस्तैनी धंधों से बाहर निकालकर विधानसभा लोकसभा में नहीं जाने देंगे।
