Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के अनमोल विचार! कभी हार ना मानने का हौसला देते हैं डॉ. भीमराव अंबेडकर के ये मोटिवेशनल कोट्स


डॉ. भीमराव अंबेडकर (Dr. Bhimrao Ambedkar), जिन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार और एक महान समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता और राजनेता थे। उन्होंने अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता के बल पर भारत और विदेशों से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वह विदेश से डॉक्टरेट (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीयों में से एक थे। वह संविधान सभा की प्रारूपण समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे, और उन्होंने भारतीय संविधान को बनाने में अहम भूमिका निभाई। संविधान में सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों को शामिल करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने अपना पूरा जीवन जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करने तथा दलितों और अन्य शोषित वर्गों के अधिकारों और समानता के लिए संघर्ष करते हुए बिताया। उनके विचार आज भी सफलता की राहें आसान बनाने में मदद करती है। ऐसे में यहां हम डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रेरक, अनमोल विचार लेकर आए हैं जो आपको सही रास्ता दिखाने में मदद करेंगे।
  1. अपने भाग्य के बजाए अपनी मजबूती पर विश्वास करो।
  2. कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा है और जब राजनीतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा जरूर दी जानी चाहिए।
  3. शिक्षा जितनी पुरूषों के लिए आवश्यक है, उतनी ही महिलाओं के लिए भी।
  4. मैं एक समुदाय की प्रगति को उस डिग्री से मापता हूं जो महिलाओं ने हासिल की है।
  5. वे इतिहास नहीं बना सकते जो इतिहास को भूल जाते हैं।
  6. भाग्य में विश्वास रखने के बजाए अपनी शक्ति और कर्म में विश्वास रखना चाहिए।
  7. जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिए बेईमानी है।
  8. जीवन लंबा होने के बजाए महान होना चाहिए।
  9. एक इतिहास लिखने वाला इतिहासकार सटीक, निष्पक्ष और ईमानदार होना चाहिए।
  10. अपने भाग्य के बजाए अपनी मजबूती पर विश्वास करो।
  11. समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा।
  12. जो व्यक्ति अपनी मौत को हमेशा याद रखता है, वह सदा अच्छे कार्य में लगा रहता है।
  13. एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है।
  14. बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।
  15. मनुष्य नश्वर है, उसी तरह विचार भी नश्वर हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत होती है, जैसे कि एक पौधे को पानी की, नहीं तो दोनों मुरझाकर मर जाते हैं।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |