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AIADMK से निकाले गए नेता केए सेंगोट्टैयन TVK में शामिल


AIADMK से निकाले गए वरिष्ठ नेता और 9 बार के विधायक केए सेंगोट्टैयन ने गुरुवार को अपने समर्थकों के साथ तमिल सुपरस्टार विजय के अगुवाई वाली तमिलागा वेट्ट्री कझगम यानी कि TVK जॉइन कर लिया। यह फैसला उन्होंने गोबिचेट्टिपालयम के विधायक पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद लिया। सेंगोट्टैयन इरोड जिले में काफी प्रभाव रखते हैं, जहां उन्होंने अपनी होम कांस्टीट्यूएंसी से 9 बार चुनाव जीता है। 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों में अब कुछ ही महीने बाकी हैं, ऐसे में उनका TVK में शामिल होना इरोड में पार्टी के लिए हवा बदल सकता है।

इस्तीफा देने के बाद बुधवार को सेंगोट्टैयन ने TVK चीफ विजय से भी मुलाकात की थी। इससे पहले, सेंगोट्टैयन के समर्थक TVK ऑफिस के बाहर इकट्ठा हुए थे, ताकि अपने नेता का पार्टी में स्वागत कर सकें। ये समर्थक गोबिचेट्टिपालयम से आए थे, और TVK के जनरल सेक्रेटरी एन. आनंद ने उनका स्वागत किया। सेंगोट्टैयन ने TVK जॉइन करने की अफवाहें जोरों पर रहने के बीच 26 नवंबर को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। अक्टूबर में AIADMK ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था, क्योंकि उन पर आरोप था कि वे पहले निकाले गए लोगों से संपर्क में थे, जो पार्टी अनुशासन तोड़ने और संगठन की बदनामी का कारण बना।

AIADMK से निकाले जाने के बाद सेंगोट्टैयन ने कहा था कि वे कोर्ट जाएंगे और निकालने के तरीके को चुनौती देंगे। उन्होंने AIADMK जनरल सेक्रेटरी ई. के. पलानीस्वामी पर तानाशाही का आरोप लगाया था। उन्होंने 1 नवंबर को कहा था, 'मैं तो पार्टी में आने से पहले ही विधायक था। पार्टी के नियम के मुताबिक, कम से कम मुझे सफाई देने के लिए नोटिस तो दिया जाना चाहिए था। पलानीस्वामी तानाशाह की तरह काम कर रहे हैं और पार्टी के नियमों के खिलाफ जाना चिंताजनक है।'

वहीं, AIADMK के जनरल सेक्रेटरी ई. के. पलानीस्वामी ने गुरुवार को सेंगोट्टैयन के TVK जॉइन करने पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'सेंगोट्टैयन अब AIADMK में नहीं हैं, इसलिए उनके TVK जॉइन करने पर मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है।' पलानीस्वामी ने पहले कहा था कि उनका फैसला कानून के मुताबिक था। उन्होंने सवाल किया था कि जब कोई पार्टी को कमजोर कर रहा हो, तो AIADMK चुप कैसे रह सकती है। उन्होंने कहा, 'जब सेंगोट्टैयन अपनी कांस्टीट्यूएंसी के इवेंट्स में जाते हैं, तो वहां हमारे नेताओं, अम्मा या थलाइवर की तस्वीरें नहीं होतीं। वे उन लोगों के साथ थे जो पार्टी से निकाले गए थे, जैसे ओ. पन्नीरसेल्वम।'

सेंगोट्टैयन इरोड जिले के गोबिचेट्टिपालयम के पास कुलमपालायम गांव से हैं। वह पहली बार 1977 में MLA चुने गए थे और AIADMK के 9 बार विधायक रह चुके हैं। जब AIADMK जानकी और जयललिता के गुटों में बंट गई थी, तो उन्होंने जयललिता का साथ दिया था। उन्होंने 'रूस्टर' सिंबल पर चुनाव लड़ा और अपनी सीट जीती। वे दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता के कैंपेन टूर शेड्यूल प्लान करने के लिए जाने जाते थे। यह सियासी घटनाक्रम आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।

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