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लखनऊः एक करोड़ अठारह लाख रुपए के साइबर फ्रॉड का हुआ खुलासा! फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट करने वाले गैंग का सदस्य गिरफ्तार


लखनऊ । राजधानी लखनऊ में पिछले माह हीरक भट्टाचार्य द्वारा साइबर क्राइम पुलिस को शिकायत दी गई थी कि उनके मोबाइल नंबर पर तथा कथित पुलिस अधिकारी विजय खन्ना का व्हाट्सएप कॉल प्राप्त हुआ था, जिसमें पीड़ित के नाम से केनरा बैंक दिल्ली में एक फर्जी बैंक खाता खोला गया और धोखाधड़ी का पैसा जमा होने जैसी बात कही गई थी। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल करने वाले ने स्वयं को ईडी अधिकारी राहुल गुप्ता बताते हुए जांच के नाम पर पीड़ित से विभिन्न बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 18 लाख 55 हजार रुपए जमा करवा लिए थे और जांच गोपनीय बताते हुए किसी से संपर्क न करने की चेतावनी दी थी। लगातार व्हाट्सएप कॉल व चैट के जरिए पीड़ित पर दबाव बनाया जा रहा था और डिजिटल रूप से बंधक बनाते हुए पैसे हड़प लिए गए। 

इसी दौरान साइबर अपराधी ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट एवं न्यायालय के सीजर आदेश भेज कर वादी को डराया धमकाया भी था और इसी एवज में एक करोड़ 18 लाख 55 हजार रुपए की धोखाधड़ी कर ली थी। इस संबंध में पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में लिखित शिकायत देते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। जिसपर साइबर क्राइम पुलिस कार्यवाही में जुट गई। 

एक माह की कार्यवाही के बाद आखिरकार साइबर क्राइम पुलिस को सफलता प्राप्त हुई। साइबर क्राइम में संलिप्त एक अभियुक्त लखनऊ के ग्राम सैफलपुर थाना काकोरी मलिहाबाद निवासी 39 वर्षीय कमलेश कुमार पुत्र शिव बालक को गिरफ्तार कर लिया गया। अभियुक्त के कब्जे से एक रियल मी मोबाइल फोन बरामद किया गया। गिरफ्तार अभियुक्त ने बताया कि वह घर पर मिठाई बनाकर विभिन्न दुकानों पर सप्लाई करता था। इस कार्य के दौरान अगस्त माह में उसकी मुलाकात सीतापुर निवासी अनुराग नामक एक व्यक्ति से हुई थी, जिसने उसे एक स्कीम के बारे में बताया। अनुराग ने बताया था कि यदि वह अपने नाम से एक बैंक खाता खुलवाकर, उस खाते से संबंधित सिम उसे दे दे, तो उसे खाते के कुल लेनदेन का 2ः कमीशन मिलेगा। जिसपर अभियुक्त ने कमिशन के लालच में गोमतीनगर क्षेत्र स्थित इंडसइंड बैंक में अपना खाता खुलवाया और खाते से संबंधित सभी दस्तावेज व सिम अनुराग को दे दिए थे। 

पूछताछ में अभियुक्त ने आगे बताया कि अनुराग विदेश में बैठकर फ्रॉडस्टरों से जुड़ा हुआ है और वह संपूर्ण ट्रांजैक्शन का 5ः न्ैक्ज् के रूप में प्राप्त करता था। वे लोग विदेशी ठगों से सीधे जुड़े हुए हैं और पीड़ितों से ठगे गए धन को विदेशी खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं। पुलिस द्वारा गहन पूछताछ में अभियुक्त ने यह भी बताया कि सितंबर 2025 में उत्तराखंड पुलिस द्वारा उसे जेल भी भेजा जा चुका है। उस वक्त भी अभियुक्त के खाते में ठगी के करोड़ों रुपए आए थे तथा खातों को छब्ब्त्च् पोर्टल पे चेक करने पर संपूर्ण भारत से करीब 22 शिकायतें दर्ज थी।

इस सफलता पर साइबर क्राइम प्रभारी द्वारा बताया गया कि साइबर अपराध कोरियर पैकटों से मिले सिम कार्ड, लिंक सिग्नेचर, आधार कार्ड आदि का दुरुपयोग कर मनी लांड्रिंग, एमडीएम तस्करी, टेररिस्ट कन्वर्जन तथा बैंक खाते में अवैध लेनदेन का झांसा देकर डिजिटल अरेस्ट करते हुए अपने कार्य को अंजाम देते हैं। वे स्वयं को पुलिस, ईडी व सीबीआई जैसे कानून परिवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताकर भोले भाले नागरिकों को डराते हैं और उनसे वसूली करते हैं। कई मामलों में पीड़ितों को डिजिटल हाउस अरेस्ट में रखा जाता है, जहां उन्हें वीडियो कॉल के माध्यम से लगातार निगरानी में रखते हुए पीड़ित को विश्वास दिलाया जाता है कि यदि वह निर्दिष्ट धनराशि नहीं देंगे, तो उन पर कानूनी कार्यवाही होगी। 

कई बार वह फर्जी पुलिस स्टेशन या जांच कक्ष जैसा सेटअप दिखाकर भी वीडियो कॉल पर पूछताछ करते हैं और डरा कर मोटी रकम ठग लेते हैं। साइबर अपराधियों द्वारा यह भी आश्वासन दिया जाता है की जांच पूरी होने पर सभी पैसे वापस कर दिए जाएंगे, साथ ही यह भी कहा जाता है कि जांच गोपनीय है इसके दौरान किसी से भी संपर्क नहीं करना है।

साइबर क्राइम पुलिस बार बार नागरिकों को आगाह भी करती है और उन्हें सलाह भी देती है कि भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए ऐसी किसी भी कॉल से डरने की जरूरत नहीं है। ट्रेडिंग या इन्वेस्टमेंट जैसे लुभाने वाले साइबर अपराध से बचें और साइबर ठगी होने पर इसकी तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 में शिकायत दर्ज कराएं।

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