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ट्रंप के झूठ की भारत सरकार ने खोल दी पोल, दुनिया के सामने खोलकर रख दिया सच


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच दिवाली के मौके पर फोन पर बातचीत हुई थी. इस बात की पुष्टि खुद पीएम मोदी ने की थी. हालांकि, इस बातचीत ने भारत-अमेरिका रिश्तों में नई हलचल पैदा कर दी है. इस फोनकॉल से दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी और सहयोग के संकेत दिखाई दिए थे. हालांकि अब यह कॉल कूटनीतिक विवाद का कारण बन गई है. भारत सरकार ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि पीएम मोदी और ट्रंप के बीच भारत-पाकिस्तान को लेकर किसी तरह की बातचीत हुई थी.

भारत के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत में पाकिस्तान पर कोई चर्चा नहीं हुई. यह दूसरा मौका है जब भारत ने ट्रंप के बयानों का सार्वजनिक खंडन किया है. इससे पहले भी भारत ने ट्रंप के उस दावे को नकार दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मोदी ने रूस से तेल आयात बंद करने का आश्वासन दिया है.

ट्रंप ने मंगलवार (21 अक्टूबर 2025) को व्हाइट हाउस में दिवाली कार्यक्रम के दौरान कहा था कि उन्होंने मोदी से बात की और भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की. उनके इस बयान के बाद भारतीय कूटनीतिक हलकों में असहजता फैल गई. भारत ने साफ तौर मना कर दिया कि ट्रंप के साथ पीएम मोदी की पाकिस्तान से संबंधित किसी भी तरह की बात नहीं हुई है. भारत ने पहले भी ये कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए युद्ध विराम में अमेरिका ने किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया था. हालांकि,डोनाल्ड ट्रंप अलग-अलग मौकों पर जिक्र किया हैं कि भारत-पाकिस्तान युद्ध विराम में अमेरिकी की भूमिका थी. इसके बावजूद भारत हमेशा यह कहता रहा है कि वह कश्मीर और खासकर पाकिस्तान से जुड़े मामले में कभी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्वीकार नहीं करता है.

प्रधानमंत्री मोदी इस सप्ताह के अंत में मलेशिया में होने वाले आसियान/पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में वर्चुअली संबोधन देने पर विचार कर रहे हैं. यह फैसला संभवतः बिहार विधानसभा चुनावों पर फोकस बनाए रखने के लिए लिया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो इससे यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि ट्रंप और मोदी की आमने-सामने मुलाकात निकट भविष्य में नहीं होगी. ट्रंप ने पहले घोषणा की थी कि वह मलेशिया में होने वाले इस सम्मेलन में शामिल होंगे. हालांकि, यह भी रिपोर्ट है कि ट्रंप अगले महीने दक्षिण अफ्रीका में होने वाले G-20 शिखर सम्मेलन में नहीं जाएंगे, जहां मोदी की उपस्थिति तय है.

भारत और अमेरिका के संबंध पिछले कुछ महीनों में लगातार तनाव और अविश्वास के दौर से गुजर रहे हैं. जहां एक ओर दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता लंबित है, वहीं ट्रंप के पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयानों ने राजनयिक असहमति को और गहरा कर दिया है. इससे पहले जून में भी प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के व्हाइट हाउस आने के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया था. यह कदम उस समय काफी चर्चा में रहा था, क्योंकि उसी अवधि में अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर का भी स्वागत किया था. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी का आसियान शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल न होना सिर्फ विदेश नीति का मसला नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियों से है. प्रधानमंत्री की व्यस्तता घरेलू चुनावों को लेकर है और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का फोकस बिहार में संगठन को मजबूत करने पर है.

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