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डिजिटल अरेस्ट केस सौंपने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब! क्या सीबीआई सभी मामले संभालने में सक्षम?


डिजिटल अरेस्ट के जरिए देशभर में हो रही ठगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से उनके यहां दर्ज मामलों का ब्यौरा मांगा है. सोमवार (27 अक्टूबर, 2025) को कोर्ट ने संकेत दिया कि जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है.

डिजिटल अरेस्ट ऑनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें जालसाज खुद को फर्जी तरीके से किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस का अधिकारी बताकर लोगों पर कानून तोड़ने का आरोप लगाते हुए उन्हें धमकाते हैं और गलत तरह से धन वसूली की कोशिश करते हैं. सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, 'अगर सीबीआई के पास संसाधनों की कमी है, तो वह इससे अवगत कराए. हम उस पर भी आदेश पारित करेंगे.'

अंबाला के जिस बुजुर्ग दंपति के साथ हुई ठगी की घटना पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनवाई शुरू की थी, उसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई है. अगले सोमवार, 3 नवंबर को मामले की सुनवाई होगी. कोर्ट ने यह माना है कि साइबर क्राइम अंतरराष्ट्रीय अपराध है, जिसे विदेश से बैठकर भी अंजाम दिया जा रहा है.

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किए और धोखेबाजों की ओर से ठगी की शिकार एक बुजुर्ग महिला की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किए गए मामलों की सुनवाई तीन नवंबर के लिए स्थगित कर दी.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील पर गौर किया कि साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट के मामलों का मूल म्यांमा और थाईलैंड जैसे विदेशी स्थानों से है. साथ ही कोर्ट ने जांच एजेंसी को इन मामलों की जांच के लिए एक योजना बनाने का निर्देश दिया.

कोर्ट ने कहा, 'हम सीबीआई जांच की प्रगति की निगरानी करेंगे और आवश्यक निर्देश जारी करेंगे.' कोर्ट ने देश में ऑनलाइन धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं, विशेषकर फर्जी न्यायिक आदेशों के माध्यम से नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट करने के मामलों का संज्ञान लेते हुए इस संदर्भ में केंद्र और सीबीआई से 17 अक्टूबर को जवाब मांगा था और कहा था कि इस तरह के अपराध न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास की नींव पर कुठाराघात हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के अंबाला में अदालत और जांच एजेंसियों के फर्जी आदेशों के आधार पर एक बुजुर्ग दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे 1.05 करोड़ रुपये की उगाही की घटना का संज्ञान लिया है. कोर्ट ने कहा था कि यह साधारण अपराध नहीं है जिसमें पुलिस से कह दिया जाए कि तेजी से जांच करे और मामले को तार्किक परिणति तक पहुंचाए बल्कि यह ऐसा मामला है जिसमें आपराधिक उपक्रम का पूरी तरह पर्दाफाश करने के लिए केंद्र और राज्य पुलिस के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं.

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