Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

कफ सिरप से 12 बच्चों की मौत के बाद केंद्र की एडवाइजरी! 2 साल से छोटे बच्चों को न पिलाएं


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार (3 अक्टूबर 2025) को स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान से एकत्र किए गए कफ सिरप के नमूनों में कोई भी डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEEG) या एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) नहीं पाया गया. ये दोनों रसायन गुर्दे को गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं और पहले भी कई देशों में बच्चों की मौतों से जुड़े रहे हैं. मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर गठित विशेषज्ञ टीम ने नमूनों की गहन जांच की और रिपोर्ट में किसी भी तरह का संदूषण सामने नहीं आया.

हाल ही में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत की खबर सामने आई थी. मृत बच्चों की उम्र 1 से 7 वर्ष के बीच थी और उनमें गुर्दे के संक्रमण और पेशाब न कर पाने जैसे लक्षण पाए गए थे. इस आशंका के बाद कि मौतें कफ सिरप से जुड़ी हो सकती हैं, केंद्र ने तुरंत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की टीम को जांच के लिए भेजा. मध्य प्रदेश के राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भी तीन नमूनों की स्वतंत्र जांच की और DEEG या EG के न होने की पुष्टि की.

NIV पुणे ने मृतकों के रक्त और CSF नमूनों की जांच की. इसमें से एक मामले में लेप्टोस्पायरोसिस पॉजिटिव पाया गया. पानी के नमूनों, कीट वाहकों और श्वसन संबंधी जांच अभी अन्य प्रयोगशालाओं में जारी है. इसका अर्थ है कि बच्चों की मौत का कारण सीधे तौर पर कफ सिरप नहीं मिला, बल्कि अन्य वजहों की संभावना पर जांच की जा रही है. राजस्थान में दो बच्चों की मौतों की जांच में यह सामने आया कि संदिग्ध कफ सिरप में प्रोपिलीन ग्लाइकॉल मौजूद नहीं था, जो कई बार DEEG या EG संदूषण का स्रोत बन सकता है. यह सिरप डेक्सट्रोमेथॉर्फन-आधारित पाया गया, जिसे बच्चों के लिए अनुशंसित नहीं किया जाता.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) के हवाले से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि छोटे बच्चों में ज्यादातर खांसी अपने आप ठीक हो जाती है और दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप बिल्कुल नहीं देना चाहिए. बड़े बच्चों में भी इसका इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दी गई है. मंत्रालय ने बताया कि जलयोजन और आराम जैसे प्राकृतिक उपाय बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित हैं. राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि इन दिशानिर्देशों का प्रचार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में किया जाए ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके.

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |