लखनऊ। राजधानी लखनऊ में वाकई योगी सरकार की गड्ढा मुक्त योजना में जमकर घोटाला हुआ है। विभाग में अधिकारियों की और क्षेत्र में पार्षदों की जेब खूब भारी। विकास के नाम पर योजनाओं का हवाला दिया गया, पर परेशान तो आम जनता ही होता आई है। फर्क सिर्फ इतना पड़ता है इस मामले में ना सरकार न प्रशासन, किसी ने भी अबतक ध्यान नहीं दिया। पत्रकार खबर लिखते रहे, आम आदमी शिकायत पर शिकायत करता रहा, पर ना सरकार और ना प्रशासन, किसी ने भी आज तक राजधानी लखनऊ में सड़क पर गड्ढों की गिनती तक नहीं गिनी और ना सुधार के विषय में पर हां जिन सड़कों से मुख्यमंत्री के काफिले को निकलना हो, उन सड़कों के गड्ढे कुछ समय के लिए भर दिए गए....
बात करते हैं राजधानी लखनऊ के विभूति खंड क्षेत्र की, जहां गड्ढा मुक्त योजना के नाम पर और विकास के नाम पर खूब जमकर घोटाला हुआ। ऐसी कोई सड़क नहीं जहां गड्ढा नहीं हो। जहां इंटरलॉकिंग होनी चाहिए, वहां इंटरलॉकिंग नहीं। कूड़े के डिब्बे मौजूद नहीं, सफाई दिखती नहीं, हरियाली के नाम पर सिर्फ दिखावा, ऐसे ही कई मामलों में विभूति खंड क्षेत्र में पार्षद, नगर निगम जोन 4, जल संस्थान ने जमकर कमाया है। लेकिन इन मामलों का जिक्र पार्षद और विभाग ने कागजों में भी खूब किया और स्थानीय लोगों को भी खूब आश्वासन दे दे कर इतना कमाया कि अच्छी खासी संपत्ति इकट्ठा कर ली।
यह नहीं कह सकते कि विकास नहीं हुआ, बस विकास किसका हुआ यह विषय समझना जरूरी है। यहां बात विभूति खण्ड के पार्षद शैलेंद्र वर्मा की हो रही है। जिन्होंने इतना अच्छा काम किया है कि आप किसी भी सड़क से गुजरिए आपका पेट हल्का हो जाएगा, क्योंकि गड्ढे जरूर मिलेंगे। सड़क किनारे गंदगी जरूर मिलेगी, क्योंकि रोज सफाई पार्षद कार्यालय के आसपास जरूर होती है और सफाई कर्मचारी एवं सुपरवाइजर भी झाड़ू का पोज बनाकर, फोटो खींचकर, नगर निगम को भेज देते हैं। फिर भी सफाई निरीक्षकों के पास रोजाना शिकायत आती है, जिस पर अगर सफाई निरीक्षक अपनी मर्जी से सफाई करने के लिए मन बना भी लेते हैं, तो पार्षद शैलेंद्र वर्मा उसपर भी पूछताछ कर लेते हैं। पूछा जाता है सफाई ऐसी जगह क्यों हो रही है?, क्योंकि उन्हें कार्यालय एवं आसपास सफाई दिखनी चाहिए, तो मतलब समझा जाएगा कि क्षेत्र में सफाई हुई है। पार्षद के जानने वालों की शिकायतों का भी निस्तारण हो ही जाता है। उसका कारण इलेक्शन और पार्टी फंड है। क्षेत्रीय लोगों की शिकायतों और क्षेत्र के विकास का हवाला देकर कागजों में खूब विकास दिखाया गया है और असलियत में विकास तो पार्षद शैलेंद्र वर्मा का ही हुआ है। भाई आखिर सफारी से फॉर्च्यूनर पर आ गए, तो क्या आप इसको विकास नहीं कहेंगे...?
विभूति खंड क्षेत्र में हर सड़क पर गड्ढे हैं और इसके लिए वहां के नागरिक सीधा दोष सरकार और प्रशासन को ही देते हैं, लेकिन असलियत में जब पार्षद और विधायक अपने क्षेत्र को देखने में नाकाम हो या विकास करने में ही नाकाम हो, तो आप इस मामले में संबंधित विभाग को भी क्यों दोष दें। जैसे कि इंटरलॉकिंग में इतना घोटाला हुआ है, कि आप जहां सड़क किनारे देखें वहां घोटाला। जहां सही सलामत इंटरलॉकिंग लगी हुई थी, उसी को उखाड़ कर दुबारा फिर से लगा दिया गया। लेकिन जहां जरूरत थी, वहां आज भी या तो कीचड़ आपको दिखाई देगा या गंदगी दिखाई देगी। कीचड़ और गंदगी के अलावा नालियां भरी हुईं और सीवर कहीं कहीं बाहर निकले मिलेंगे। फर्क सिर्फ इतना है कि कागजों में पार्षद के प्रस्ताव पर इंटरलॉकिंग का काम यानी सड़क किनारे की सुंदरता बखूबी कार्य होते दिखाया गया है। जिससे पार्षद कि जेब का तो खूब विकास हुआ है....
ऐसे ही विभूति खंड क्षेत्र स्थित मंत्री आवास की बात करें, बहुत समय पहले मंत्री आवास चैराहे के इर्द गिर्द किनारे कूड़े के डिब्बे लगाए गए थे, कुछ समय तक तो वहीं मौजूद थे, उसके बाद कहां गायब हो गए, आज तक पता ही नहीं। लेकिन कूड़े के डिब्बे में जो लागतध्सरकारी खर्च हुआ, वह कागजों में आज भी मौजूद है। सफाई और उससे संबंधित काम, कागजों में खूब दर्शाया गया है। मंत्री आवास के इर्द-गिर्द लगे कूड़े के डिब्बे अब दिखाई नहीं देते, इस पर जब नगर निगम से सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि चोर उठा ले गए होंगे, पर अगर चोर उठा ले गए हैं तो फिर पार्षद शैलेंद्र वर्मा ने थ्प्त् क्यों नहीं दर्ज कराई?, पार्षद के प्रस्ताव पर नगर निगम ने विभूति खण्ड क्षेत्र में सरकारी खर्च से कूड़े के दो छोटे और बड़े डिब्बे लगाए, पर उसकी सुरक्षा नहीं कर पाए।
वैसे भी अगर विभूति खंड क्षेत्र के विकास का निरीक्षण किया जाए, तो आपकी आंखे और मुंह दोनों खुले के खुले रह जाएंगे। क्योंकि क्षेत्र का विकास तो हुआ ही नहीं, पर पार्षद का विकास जरूर हुआ है। वहां के नागरिकों के मन में विकास और सुविधाओं को लेकर काफी सवाल भी है और अंदर ही अंदर गुस्सा भी भरा हुआ है।
