बाराबंकी। छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में शोधित देशी बीजों का ट्रायल बाराबंकी में किया गया है, जो खेतों में लहलहा रहा है। वर्मी कंपोस्ट और खली के मिश्रण से बादशाह, देवभोग, विष्णु भोग, दुबराज, कनकजीर, 6819 धान की ये किस्में खिल उठी हैं। सुगंधित व उच्च उत्पादन देने वाली धान की इन किस्मों का विकास हाईब्रिड से कहीं अधिक है। अनुमान है कि डेढ़ गुणा धान का उत्पादन अधिक होगा।
मसौली के ग्राम रजाईपुर निवासी किसान विपिन वर्मा धान की देशी बीजों से खेती कर रहे हैं, ताकि हाईब्रिड की खेती करने वाले किसानों से देशी बीजों को अंकुरित कराया जा सके। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने देशी किस्मों को अपग्रेड किया था। रजाईपुर में लगभग नौ बीघा में देशी बीजों का ट्रायल कर खेती की जा रही है। यह परीक्षण न केवल स्थानीय जलवायु के अनुसार इन प्रजातियों को परखने में मदद करेगा, बल्कि किसानों को परंपरागत खेती से आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित करेगा।
देशी बीजों का ट्रायल सफल हो रहा है। इसमें रासायनिक खादों को न डालकर प्रति एकड़ 60 किलो वर्मी कंपोस्ट और 40 किलो सरसों की खली 20-20 दिनों में दो बार डाली गई। इस समय धान का व्यास (विकास) अन्य धानों की अपेक्षा कहीं अधिक है। देखने में डेढ़ गुणा अधिक विकास है, बालियां मोटी हैं।
विष्णु भोग, दुबराज, देवभोग, बादशाह, कनकजीर, 6819 धान में आयरन और जिंक की मात्रा अधिक है। उत्पादन की क्षमता प्रति एकड़ 26 से 27 क्विंटल है, जबकि हाईब्रिड से प्रति एकड़ 24 से 25 क्विंटल धान की पैदावार होती है। यही नहीं, हाईब्रिड धान का बीज 400 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक है, जबकि रायपुर में विकसित धान बीज का रेट महज 50 से 60 रुपये प्रति किलो रुपये निर्धारित किया गया है, ताकि किसानों को सस्ते दाम में उच्च गुणवत्ता वाला धान बीज मिल सके।
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