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पुलिस थानों में सीसीटीवी की कमी पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, हिरासत में हुई मौतों की खबर पर लिया स्वतः संज्ञान


पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी और खराब स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इससे जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मामले की सुनवाई का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि इस साल हिरासत में मौत की 11 घटनाएं सामने आई हैं.

ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरा लगाने को लेकर आदेश दे चुका है. 2 दिसंबर 2020 को परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले में ऐसा ही एक आदेश आया था. तब जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस के एम जोसफ और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने देश भर के पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने का निर्देश दिया था. उस आदेश में कोर्ट ने सभी राज्यों को पुलिस स्टेशनों में ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ CCTV कैमरे लगाने को कहा था.

कोर्ट के आदेश के मुताबिक यह कैमरे पुलिस स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार, लॉकअप, कॉरिडोर, लॉबी, रिसेप्शन, सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर के कमरे, थाने के बाहर और वॉशरूम के बाहर लगाए जाने थे. तब कोर्ट ने राज्यों को इस निर्देश का पालन 6 महीने में करने को कहा था. कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी सिस्टम के कामकाज की देखरेख के लिए राज्य के गृह सचिव, डीजीपी, राज्य महिला आयोग अध्यक्ष का पैनल बनाने को कहा था. ऐसा ही पैनल जिला स्तर पर भी बनाया जाना था.

2020 में आया कोर्ट का आदेश पुलिस स्टेशन के अलावा CBI, NIA, ED, NCB, डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस और सीरियस फ्रॉड इनवेस्टीगेशन ऑफिस के लिए भी था. कोर्ट ने कहा था कि CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग को 18 महीने तक रखा जाए. साथ ही, हर जिले में मानवाधिकार न्यायालय बनाए जाएं, जिनमें हिरासत में यातना की शिकायत की जा सके. अब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नए सिरे से संज्ञान लेने से इन सभी बातों को दोबारा समीक्षा हो सकेगी.

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