लखनऊ/सहारनपुर। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि उत्तर प्रदेश में हृदय रोगों का एक बड़ा कारण छुपा हुआ नमक है। लोग अक्सर सोचते हैं कि वे खाने में जितना नमक डालते हैं, वही उनके स्वास्थ्य पर असर डालता है। लेकिन सच यह है कि पैकेट वाले स्नैक्स, ब्रेड, अचार, सॉस, चटनी और तली-भुनी चीजों में पहले से मौजूद सोडियम सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
इन खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में नमक की मात्रा दोगुनी से भी ज्यादा पहुँच जाती है। यही अतिरिक्त सोडियम धीरे-धीरे रक्तचाप बढ़ाता है, धमनियों को कमजोर करता है और स्ट्रोक, किडनी रोग और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। राष्ट्रीय पोषण सर्वे के अनुसार भारतीय रोजाना 5 ग्राम की अनुशंसित सीमा से लगभग दोगुना नमक खा रहे हैं।डॉ. एजाज अहमद शाह, डीएम कार्डियोलॉजी, किरण हेल्थ केयर सेंटर, सहारनपुर, का कहना है, “खतरा उस नमक से नहीं है जो हम थाली में डालते हैं, बल्कि उस सोडियम से है जो पैकेट और बाहर के खाने में छिपा होता है। उच्च रक्तचाप को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी लक्षण के अचानक बड़ी समस्या पैदा करता है। अगर लोग छुपे हुए नमक को कम कर लें, तो दिल की बीमारियों का खतरा काफी घट सकता है।”उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहाँ तली-भुनी और नमकीन चीजें जीवनशैली का हिस्सा हैं और पैकेट वाले प्रोसेस्ड फूड्स तेजी से गाँव-गाँव पहुँच रहे हैं, यह समस्या और गंभीर हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अब जागरूक होकर छोटे-छोटे कदम उठाने चाहिए कृ पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का लेबल ध्यान से पढ़ना, अचार और नमकीन स्नैक्स कम करना, नींबू और हर्ब्स जैसे प्राकृतिक स्वाद का इस्तेमाल करना और घर का ताजा खाना प्राथमिकता देना।
संदेश साफ हैरू हृदय रोग से लड़ाई अस्पताल या दवाइयों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के भोजन से शुरू होती है। इस विश्व हृदय दिवस पर सबसे जरूरी है छुपे हुए नमक को पहचानना, उसे कम करना और अपने दिल को सुरक्षित रखना।
