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इमरजेंसी में फतेहगढ़ जेल में बंद थे सत्यपाल मलिक, इंदिरा गांधी का एक संदेश चौधरी चरण सिंह तक पहुंचाने के लिए भेजा गया था तिहाड़


इमरजेंसी का दौर चल रहा था. विपक्ष के सभी बड़े नेता या तो जेल में बंद थे या फिर नजरबंद थे. 1976 आते-आते इंदिरा गांधी ने देश में चुनाव कराने पर विचार करना शुरू कर दिया था. इसके लिए उन्होंने जेल में बंद बड़े नेताओं चौधरी चरण सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी और चंद्रशेखर से संपर्क साधना शुरू कर दिया था. वह चाहती थीं कि विपक्ष के नेता जेल से बाहर आकर उनके खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी न करें, ताकि हालात ना बिगड़ें. सबसे पहले इंदिरा गांधी ने चरण सिंह के करीबी माने जाने वाले सत्यपाल मलिक से ही संपर्क किया था.

1976 के आखिर तक जेल में बंद उनमें से कई नेता सुलह करने के मूड़ में थे. सत्यपाल मलिक ने बताया कि इंदिरा गांधी ने मार्च 1976 में चरण सिंह के साथ समझौता किया था, जिसके बाद 7 मार्च, 1976 को किसान नेता की रिहाई हुई थी.

वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने अपनी किताब 'हाऊ प्राइम मिनिस्टर डिसाइड' में लिखा है कि इंदिरा गांधी ने सत्यपाल मलिक के जरिए ही चरण सिंह जैसे कठोर स्वभाव वाले व्यक्ति को, जो उनके सबसे कटु आलोचक थे, अपने साथ लाने का प्रयास किया. फरवरी 1976 में उन्होंने सत्यपाल मलिक को फतेहगढ़ जेल से तिहाड़ जेल में ट्रांसफर कर दिया था. मलिक के अनुसार, जब वे तिहाड़ जेल पहुंचे तो उन्हें सीधे जेल अधीक्षक के कमरे में ले जाया गया था. उन्हें ये देखकर आश्चर्य हुआ कि कांग्रेस नेता और इंदिरा गांधी के करीबी नेताओं में से एक एच के एल भगत उनका इंतजार कर रहे थे.

एच के एल भगत ने सत्यपाल मलिक से कहा कि आपको चरण संह के बगल वाली कोठरी में रखा जाएगा, आप उनसे बातचीत कर लें. उन्होंने कहा मलिक से कहा, 'प्रधानमंत्री चुनाव कराना चाहती हैं और विपक्षी नेताओं को रिहा करना चाहती हैं. पर वो बाहर आकर उपद्रव न करें.' मलिक ने चरण सिंह के बारे में कहा कि वो इस विचार के खिलाफ नहीं हैं.

जब सत्यपाल मलिक ने चरण सिंह को एच के एल भगत के बार में बताया तो उन्होंने सत्यपाल को चेतावनी देते हुए कहा, 'मुझे भगत पर भरोसा नहीं है. आप इन लोगों से पहले खुद को रिहा करवाएं और फिर खुद जाकर इंदिरा गांधी से बात करें.'

सत्यपाल मलिक रिहा हुए और इंदिरा गांधी से जाकर मिले. इंदिरा ने चरण सिंह को लेकर मलिक से कहा, 'हम तो हाथ बढ़ाते हैं उनकी तरफ, पर वो अपने हाथ पीछे कर लेते हैं.'

इंदिरा गांधी से मीटिंग के बाद जब सत्यपाल मलिक ने जेल में आकर चरण सिंह से कहा तो उन्होंने कहा कि मैं अकेले नहीं रिहा होऊंगा. मेरे साथ 4-5 लोगों को भी रिहा करना चाहिए. इसलिए चरण सिंह के साथ बीजू पटनायक, पीलू मोदी जैसे अन्य नेताओं को भी जेल से रिहा कर दिया गया था.

मलिक के अनुसार, रिहाई के बाद चरण सिंह अपने वादे पर अड़िग रहे कि वो सार्वजनिक रूप से इंदिरा गांधी पर हमला नहीं करेंगे. केवल एक बार वो भावुक हुए और रिहाई के कुछ हफ्ते बाद 23 मार्च 1976 को उत्तर प्रदेश विधानसभा में आपातकाल और इंदिरा गांधी द्वारा एक लाख लोगों को जेल में डालने के बारे में चार घंटे तक भाषण दिया.

इसी तरह इंदिरा गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी और चंद्रशेखर के पास भी अपने विश्वासपात्रों को भेजा और उनसे शांति बनाए रखने की बात कही, जिसके बाद जेल में बंद विपक्षी नेताओं को जेल से रिहा कर दिया गया. 18 जनवरी 1977 को इंदिरा गांधी ने देश को चौंकाते हुए चुनावों की घोषणा कर दी, जिसके बाद देश में चुनाव हुए और इंदिरा गांधी ये चुनाव हार गईं. इस चुनाव में जनता पार्टी ने जीत हासिल की और मोरारजी देसाई देश के अगले प्रधानमंत्री बने.

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