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देहरादून सहित कई इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ का खतरा


उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते हालात चुनौतीपूर्ण बनते जा रहे हैं। धराली की आपदा से अब भी राज्य पूरी तरह से उबर नहीं पाया है। इधर लगातार बारिश के चलते आठ अन्य जिलों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। रविवार (17 अगस्त) को भी दोहरादून में बारिश का सिलसिला जारी है। ऐसे में उत्तराखंड के आपातकालीन परिचालन केंद्र ने देहरादून, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी जिलों के जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में भारी बारिश के कारण जल भराव और बाढ़ के खतरे की आशंका के मद्देनजर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

हरिद्वार में रविवार सुबह से तेज बारिश हो रही है। तेज बारिश के कारण हरिद्वार के उपनगर ज्वालापुर के बाजार जलमग्न हो गए हैं। बाजारों में दुकानों के अंदर पानी भर गया है, जिससे काफी नुकसान हुआ है और वाहनों को निकालने में दिक्कत हो रही है। कई वाहन फंस गए हैं। वहीं, हरिद्वार में भगत सिंह चौक, भूपत वाला और अन्य जगहों पर बरसात का पानी भरने से आवागमन में दिक्कत हो रही है। गंगा नदी खतरे के निशान से केवल 40 इंच नीचे बह रही है। हरिद्वार जिला प्रशासन ने हरिद्वार जनपद के गंगा नदी के किनारे पर स्थित गांवों में चेतावनी जारी कर दी है।

उत्तराखंड सरकार ने बताया कि तहसील बागेश्वर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरबाड़ गांव में बारिश और भूस्खलन के कारण 7 परिवारों के घर खतरे में आ गए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से संबंधित व्यक्तियों को राजकीय प्राथमिक विद्यालय, हरबाड़ और पंचायत भवन, हरबाड़ में स्थानांतरित कर दिया गया है। उत्तराखंड सरकार ने बताया कि पटवारी के माध्यम से प्रत्येक परिवार को खाद्यान्न किट वितरित कर दी गई है। सरकार से मिली जानकारी के अनुसार, क्षतिग्रस्त हुई आटा चक्की और दुकान को भी खाद्यान्न वितरित कर दिया गया है। पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से लोगों को परेशानी हो रही है।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर शनिवार को भूस्खलन के मलबे की चपेट में आने से महाराष्ट्र के एक तीर्थयात्री की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि गौरीकुंड से लगभग एक किलोमीटर ऊपर, केदारनाथ यात्रा मार्ग पर छोड़ी गधेरा के पास पहाड़ी से गिरे एक बड़े पत्थर की चपेट में आने से परमेश्वर भीम राव खवाल (38) की मौत हो गई। खवाल महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के रहने वाले थे। वहीं, ऋषिकेश में गंगा की सहायक नदी चंद्रभागा को पार कर रहे दंपति तेज प्रवाह में बह गए। त्रिवेणी घाट पुलिस चौकी के प्रभारी विनेश कुमार ने शनिवार को बताया कि चंद्रेश्वर नगर निवासी पिंटू (26) और उनकी पत्नी लक्ष्मी (25) मायाकुंड से नदी पार करने की कोशिश कर रहे थे कि तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वे नदी की तेज धाराओं में बह गए। उन्होंने बताया कि यह घटना शुक्रवार शाम करीब सात बजे हुई। घटना के तुरंत बाद जल पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के कर्मियों द्वारा तलाश अभियान शुरू किया गया, लेकिन शाम को इसे रोकना पड़ा। हालांकि, शनिवार सुबह इसे फिर से शुरू किया गया, लेकिन दंपति का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

उत्तराखंड के आपदा प्रभावित धराली और हर्षिल में जनजीवन को पटरी पर लाने के प्रयास शनिवार को भी जारी रहे। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर मरम्मत कार्य जारी है और कर्मचारी अचानक आई बाढ़ के बाद भागीरथी नदी में बनी अस्थायी झील से जल निकासी के काम में लगे हुए हैं। झील का पानी निकालने के काम में लगे कर्मचारियों ने बताया कि झील का जलस्तर कम होने लगा है, जो एक उत्साहवर्धक संकेत है। चट्टान, खंभे और सड़क किनारे की रेलिंग जैसे डूबे हुए हिस्से अब दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि एक तरफ गाद की मोटी परत बनी हुई है, जिसे जेसीबी की मदद से साफ किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि यह कवायद नियंत्रित तरीके से की जा रही है ताकि नीचे की ओर अचानक बाढ़ आने से बचा जा सके। पांच अगस्त को खीरगंगा नदी में आयी भीषण बाढ़ में धराली गांव में दर्जनों होटल, रेस्तरां, होमस्टे तथा मकान तबाह हो गए थे। कुल 69 लोग लापता हैं, जिनमें नौ सैन्यकर्मी, 25 नेपाली नागरिक, बिहार के 13, उत्तर प्रदेश के छह, धराली के आठ, उत्तरकाशी के निकटवर्ती क्षेत्रों के पांच, टिहरी के दो और राजस्थान का एक व्यक्ति शामिल है।

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