Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

दर्द भरी दास्तां! पल-पल जूझ रही नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्ट्रेस, खतरनाक स्टेज 4 कैंसर से जंग बनी एक मां की जिद


कभी परदे पर किरदारों में जान फूंकने वाली अभिनेत्री तनिष्ठा चटर्जी आज एक ऐसी स्क्रिप्ट जी रही हैं, जिसमें कोई रीटेक नहीं होता और जिसे निभाना सिर्फ मुश्किल नहीं, बेहद दर्दनाक है। लेकिन फिर भी वह पूरी मजबूती और संवेदना के साथ इस भूमिका को निभा रही हैं, एक अभिनेत्री, एक निर्देशक और सबसे बढ़कर एक मां के रूप में। साल भर भी नहीं हुआ, जब तनिष्ठा ने अपने पिता को कैंसर से खो दिया। शोक में डूबने का भी वक्त नहीं था। घर में 70 साल की मां और 9 साल की बेटी की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी, लेकिन ठीक एक साल के भीतर ही उनकी जिंदगी ने ऐसी करवट ली, जिसकी उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी।

तनिष्ठा कहती हैं, 'पापा के जाने के पांच दिन बाद ही मैं शूटिंग पर लौट गई थी। रुकने का समय नहीं था। पापा के पसंदीदा गाने सुनकर खुद को याद दिलाती थी कि मुझे चलते रहना है।' लेकिन किस्मत ने एक और वार कर दिया। इसी साल पिता की मौत के चंद महीने बाद उन्हें पता चला कि उन्हें मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर है, वो भी स्टेज IV। एक्ट्रेस कहती हैं, 'मैं ‘एक रुका हुआ फैसला’ फिल्म की शूटिंग कर रही थी और उसी दौरान जिंदगी ने मुझे मेरी सबसे कठिन भूमिका सौंप दी। मैंने सोचा, क्यों? मेरे साथ ही क्यों? क्या ये कर्म है?'

तनिष्ठा एक सिंगल मदर हैं। साल 2019 में उन्होंने एक बेटी को गोद लिया था। शादी नहीं की, लेकिन मां बनने का सपना बहुत छोटी उम्र से देखा था। उनका कहना था, 'मैं 16 साल की थी, जब मैंने तय किया था कि मैं बच्चा गोद लूंगी। लोग हंसते थे, पर मुझे पता था कि ये मेरा सच है।' अब जब कैंसर ने उनकी दुनिया हिला दी, तब सबसे कठिन निर्णय उन्हें अपनी बेटी को लेकर लेना पड़ा। उनका कहना है, 'मैं नहीं चाहती थी कि मेरी बेटी मुझे कमजोर देखे। मैं चाहती हूं कि वो मुझे हमेशा उसी तरह देखे जैसे वो मुझे देखती है-सुपरवुमन। इसलिए मैंने उसे अपनी बहन के पास अमेरिका भेज दिया। उसका बचपन डर के साए में न गुजरे, ये मेरे लिए सबसे जरूरी था।'

इलाज शुरू हुआ तो डॉक्टरों ने कहा किसी भरोसेमंद को साथ लाओ, कागजों पर हस्ताक्षर करने होंगे, मेडिकल फैसले लेने होंगे। मां बुजुर्ग थीं, बेटी दूर। तब बहन ने उन्हें याद दिलाया, 'अब मदद मांगने का वक्त है।' और यहीं से शुरू होती है एक नई कहानी इंसानियत की। तनिष्ठा बताती हैं कि उनके दोस्तों ने उन्हें एक पल के लिए भी अकेला महसूस नहीं होने दिया। शबाना आजमी, ऋचा चड्ढा, कोंकणा सेन शर्मा, विद्या बालन, दिव्या दत्ता, उर्मिला मातोंडकर और दीया मिर्जा, ये नाम सिर्फ स्क्रीन के सितारे नहीं हैं, बल्कि तनिष्ठा की जिंदगी की लड़ाई में उनके सबसे मजबूत सहारे बनकर खड़े हैं। वो बताती हैं, 'कीमोथेरेपी के हर सेशन में कोई न कोई मेरे साथ था। कभी हाथ थामने वाला, कभी हंसाने वाला, कभी चुपचाप बैठने वाला। यही लोग मेरे असली परिवार बन गए।'

तनिष्ठा कहती हैं, 'सबसे बड़ी सीख जो मुझे मिली, वो ये है कि लोग परवाह करते हैं। आपको सिर्फ उन्हें पुकारना होता है।' उनकी आंखों में आंसू हैं पर चमक भी है, उम्मीद की, जिद की, जज्बे की। वो कहती हैं, 'मैं थक गई हूं... मजबूत होने से। पर अब भी हर सुबह उठती हूं, अपनी बेटी की तस्वीर देखती हूं और खुद से कहती हूं कि एक दिन और। बस एक दिन और।'

एक्ट्रेस ने अपने हालिया पोस्ट में लिखा, 'तो पिछले 8 महीने बेहद मुश्किल रहे हैं - हल्के शब्दों में कहें तो। मानो कैंसर से अपने पिता को खोना ही काफी नहीं था। 8 महीने पहले मुझे स्टेज 4 ओलिगो मेटास्टेटिक कैंसर का पता चला, लेकिन यह पोस्ट दर्द के बारे में नहीं है। यह प्यार और ताकत के बारे में है। इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता। एक 70 साल की मां और 9 साल की बेटी... दोनों पूरी तरह से मुझ पर निर्भर हैं। लेकिन सबसे मुश्किल पलों में मुझे एक असाधारण प्यार का एहसास हुआ, जो सामने आता है, जगह बनाता है और आपको कभी अकेला महसूस नहीं होने देता। मुझे यह प्यार मेरे अद्भुत दोस्तों और परिवार में मिला, जिनके अटूट समर्थन ने सबसे मुश्किल दिनों में भी, मेरे चेहरे पर सच्ची मुस्कान ला दी।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |