Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

'हां मैंने चुराई थी 150 रुपये की घड़ी', आरोपी ने 49 साल बाद कुबूला जुर्म


यूपी के झांसी जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है जहां लगभग 49 साल पहले एक सहकारी समिति में हुई चोरी की घटना के आखिरी जीवित आरोपी ने आखिरकार अपना जुर्म कुबूल कर लिया। उसने कोर्ट में कहा कि वो अब थक चुका है और अपराध स्वीकार करता है। इसके बाद अदालत ने मुकदमा दायर होने के बाद जेल में बिताई गई अवधि को उसकी सजा में समायोजित कर मामले का निपटारा कर दिया।

मार्च 1976 से शुरू हुआ यह मामला अनगिनत सुनवाइयों के कारण 49 साल से ज्यादा वक्त तक चला। इस दौरान दो अन्य सह-आरोपियों की मौत हो गई। इस ‘मैराथन’ प्रक्रिया का अंत शनिवार को तब हुआ झांसी में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में कठघरे में खड़े आरोपी कन्हैया लाल ने अपने बुढ़ापे और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए दशकों पुराने मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। आरोपी ने कोर्ट में खुद ही जुर्म स्वीकार लिया। उसने कहा, ये जुर्म मैंने ही किया है। लेकिन तारीख पर आते-आते थक गया हूं। अब केस लड़ने की शक्ति नहीं है और बीमारी का हवाला देकर रहम की गुहार भी लगाई।

अभियोजन अधिकारी अखिलेश कुमार मौर्य ने मंगलवार को बताया कि 31 मार्च 1976 को टहरौली स्थित वृहद सहकारी समिति (LSS) के तत्कालीन सचिव बिहारी लाल गौतम ने एक मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया था कि 27 मार्च 1976 को कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में तैनात कन्हैया लाल ने दफ्तर से एक सरकारी रसीद पुस्तिका और 150 रुपये मूल्य की एक घड़ी चोरी की थी। शिकायत में कहा गया कि कन्हैया लाल ने रसीद पुस्तिका में जाली हस्ताक्षर किए और 14 हजार रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की। इस मामले में लक्ष्मी प्रसाद और रघुनाथ नामक दो अन्य व्यक्तियों पर भी जाली रसीदें जारी करने और गबन करने का आरोप लगाया गया था

मौर्य ने बताया कि तीनों को कुछ ही समय बाद गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बाद लगभग 5 दशकों तक इस मामले की अदालती प्रक्रिया खिंचती गई। इसी दौरान आरोपी लक्ष्मी प्रसाद और रघुनाथ की मौत हो गई। आखिरकार 46 साल बाद 23 दिसंबर, 2022 को मुख्य आरोपी कन्हैया लाल के खिलाफ आरोप तय किए गए।

गत शनिवार को नियमित सुनवाई के दौरान 68 वर्षीय कन्हैया लाल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुन्ना लाल के सामने पेश हुआ और उसने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। कन्हैया लाल ने अदालत को बताया कि वह अपनी बिगड़ती सेहत और बढ़ती उम्र के कारण अपना अपराध स्वीकार करना चाहता है। अदालत ने कन्हैया लाल की अपराध स्वीकारोक्ति को कुबूल करते हुए उसे तत्कालीन भारतीय दंड विधान की धाराओं 380 (चोरी), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 467, 468 (जालसाजी), 457 (घर में सेंधमारी) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुजरिम करार दिया और मुकदमे की अवधि में जेल में बितायी गई 6 महीने की अवधि को सजा के तौर पर समायोजित कर दिया। उन्होंने बताया कि अदालत ने कन्हैया लाल पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अगर वह जुर्माना नहीं भरता है तो उसे तीन दिन की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |