झुग्गीवालों के बीच पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी! लोगों से पूछा- कितने एकड़ में चला बुलडोजर
July 25, 2025
कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार (25 जुलाई 2025) दिल्ली के अशोक विहार स्थित जेलरवाला बाग और वजीरपुर क्षेत्र का दौरा किया, जहां उन्होंने झुग्गीवालों से मुलाकात की. उन्होंने वहां पर डीडीए की तरफ से की गई झुग्गी तोड़फोड़ के बाद प्रभावित लोगों से सीधे मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं. इस दौरान में राहुल गांधी ने एक सवाल पूछा "यह इलाका कितने एकड़ में फैला है?" जब एक व्यक्ति ने जवाब दिया, "100 एकड़," तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "भइया, सौ एकड़ तो मैं पैदल चला हूं. इस भावनात्मक प्रतिक्रिया ने दर्शकों से तालियां तो बटोरीं, लेकिन साथ ही कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इसे पॉलिटिकल ड्रामा करार दिया. वीडियो क्लिप को कांग्रेस ने अपने X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर साझा किया और लिखा कि राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका दर्द साझा किया. लेकिन कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पहल पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस की ही सरकारों को ऐसे मामलों में जिम्मेदार बताया.
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार जेलरवाला बाग और वजीरपुर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी. इस दौरान लगभग 300 झुग्गियों को ध्वस्त किया गया. डीडीए अधिकारियों के अनुसार, इस भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था और नोटिस दिए जाने के बावजूद कई लोगों ने जमीन खाली नहीं की. रेलवे पटरी के पास की गई अतिक्रमण की बात भी सामने आई. हालांकि, कुछ झुग्गी निवासियों का दावा है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज (आधार, वोटर आईडी आदि) हैं और वे वर्षों से वहां रह रहे हैं.अदालत से कई परिवारों ने स्टे ऑर्डर भी प्राप्त कर लिए हैं, जिससे कुछ निर्माणों को तोड़ने पर रोक लगी है.
डीडीए ने पुनर्वास योजना के तहत अशोक विहार फेज-2 में ‘स्वाभिमान अपार्टमेंट’ नाम से 1675 ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स बनाए हैं. प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल 400 वर्ग फुट है और ₹25 लाख की लागत आई है. पात्र झुग्गीवासियों को सिर्फ 1.42 लाख रुपये में यह फ्लैट दिया जा रहा है, साथ ही ₹30,000 पांच साल की मेंटेनेंस फीस के रूप में जमा करनी होगी. अब तक 1078 लोगों को फ्लैट मिल चुके हैं, लेकिन 567 लोगों को ‘अयोग्य’ घोषित किया गया है। इन्हें अपील का अवसर दिया गया है, लेकिन कई निवासियों का आरोप है कि प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और पुनर्वास में भेदभाव किया जा रहा है.