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हमें पाकिस्तानियों से पूछना चाहिए कि क्या वे चाहते हैं कि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिले-ओवैसी


एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अपने बयान में जहां पाकिस्तान का मजाक उड़ाया वहीं ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अमेरिकी बमबारी के बाद, मध्य पूर्व के कुछ अरब देश इजरायल की "ब्लैकमेलिंग और आधिपत्य" के कारण परमाणु हथियार बनाने की ओर बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, "ईरान के परमाणु ठिकानों पर (अमेरिका द्वारा) हमला अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र अध्याय, एनपीटी का उल्लंघन है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान का भी उल्लंघन करता है क्योंकि इसमें कहा गया है कि कांग्रेस की अनुमति के बिना देश लड़ाई नहीं कर सकता।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने भी पहले कहा था कि ईरान में (परमाणु हथियार) कुछ भी नहीं है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि अमेरिका गाजा में हो रहे नरसंहार को छुपा रहा है। ओवैसी ने कहा कि इजरायल के पास 700-800 परमाणु हथियार हैं, जिन पर एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों को उनका निरीक्षण करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि पांच से दस साल में ईरान 90 प्रतिशत तक यूरेनियम का संवर्धन कर लेगा और इसे रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने पाकिस्तान का मजाक उड़ाते हुए कहा कि क्या वह ईरान पर हमलों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कर रहा है? लोकसभा सांसद ने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान ने ट्रंप का समर्थन सिर्फ इसलिए किया था ताकि वह एक संप्रभु राष्ट्र पर बम गिराए। हैदराबाद में ओवैसी ने कहा, "हमें पाकिस्तानियों से पूछना चाहिए कि क्या वे चाहते हैं कि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिले। एआईएमआईएम नेता ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, "...क्या पाकिस्तान के जनरल (सेना प्रमुख असीम मुनीर) ने इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ लंच किया था? आज वे सभी बेनकाब हो गए हैं।"

उन्होंने एएनआई से कहा, "हमें यह भी याद रखना चाहिए कि खाड़ी और मध्य पूर्व में 16 मिलियन से अधिक भारतीय रहते हैं, और यदि उस क्षेत्र में युद्ध छिड़ जाता है, जिसकी दुर्भाग्य से बहुत संभावना है, तो इसका वहां रहने वाले भारतीयों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।" उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "भारतीय कंपनियों ने इन सभी अरब देशों या खाड़ी देशों में जो निवेश किया है, और विदेशी निवेश का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।"

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