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प्रयागराजः उच्च न्यायालय ने कहा, जोड़े के शांतिपूर्ण जीवन में कोई न करें हस्तक्षेप


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग जोड़े द्वारा परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने की जानकारी के बाद चंदौली की मनोरमा और एक अन्य की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दिया है. यह आदेश जस्टिस डॉ गौतम चैधरी ने दिया है. याचिका में 20 वर्षीय बेटी को पेश करने और उसे याची की अभिरक्षा में सौंपने का अनुरोध किया गया था।

कहा गया कि विपक्षी कृष्णा उर्फ पप्पू बिजली वायरिंग का काम करता है, याची के घर आता-जाता था. आरोप है कि कृष्णा, याचिनी की बेटी को परेशान करता था और एक मई, 2025 को उसे बहला-फुसलाकर भगा ले गया.

अपर शासकीय अधिवक्ता ने कहा जांच में पता चला है कि याची की बेटी और आरोपी कृष्णा दोनों बालिग हैं. उन्होंने अपनी मर्जी से प्रेम विवाह कर लिया है. अपनी शादी की तस्वीरें, मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध कराए हैं. दस्तावेजों के अवलोकन से यह स्थापित हुआ है कि दोनों बालिग हैं और विवाह के बाद अपना वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं.

अदालत ने कहा कि चूंकि कथित कॉर्पस अपनी इच्छा से प्रतिवादी कृष्णा के साथ विवाह कर लिया है और वह सुखपूर्वक साथ रह रही है. वह बालिग हैं, इसलिए वह जहां और जिसके साथ रहना चाहे, रहने के लिए स्वतंत्र है. न्यायालय ने निर्देश दिया कि कोई भी व्यक्ति उनके शांतिपूर्वक वैवाहिक जीवन में बाधा उत्पन्न नहीं करेगा.एक मुचलका व दो प्रतिभूति लेकर सभी 13 केसो में मिली जमानत पर रिहाई का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13आपराधिक केस में मिली जमानतों में अलग अलग प्रतिभूति देने में असमर्थ आरोपी को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि याची को एक जमानत मुचलके व दो प्रतिभूति लेकर सभी केसों में स्वीकार्य मानते हुए रिहा करने का निर्देश दिया है.

यह आदेश जस्टिस विक्रम डी चैहान की एकलपीठ ने ललितपुर के महेश प्रसाद रजक की अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है. अर्जी पर अधिवक्ता अश्वनी कुमार ओझा ने बहस की. इनका कहना है कि याची के खिलाफ ललितपुर के विभिन्न थानों, कोतवाली, जखौरा, जालौन, महरौनी, ताल बेहट, नरहट में दर्ज आपराधिक केसों में जमानत मिली है. हर केस में दो प्रतिभूति व मुचलका देने का आदेश है. अर्जी दाखिल कर एक केस के मुचलके व प्रतिभूति को सभी केसों के लिए मान्य किया जाय जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र में दर्ज फर्जीवाड़ा मामले में आरोपी खुर्शीद अहमद खान को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है. यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकल पीठ ने पारित किया. कैंट थाने में खुर्शीद अहमद खान पर आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 323, 504, 506, 384 के तहत केस दर्ज है. आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की।

कोर्ट ने कहा, इसी मामले में सह-आरोपी अयाज अहमद को 20 फरवरी 2025 को अग्रिम जमानत मिल चुकी है और खुर्शीद का मामला भी समान आधार पर है. कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी को अंतिम विकल्प माना जाना चाहिए और यह केवल उन्हीं मामलों में हो जब यह अनिवार्य हो. कोर्ट ने सुशीला अग्रवाल बनाम दिल्ली राज्य केस और जोगिंदर कुमार बनाम उत्तर प्रदेश सरकार केस का हवाला देते हुए गिरफ्तारी की मनमानी प्रक्रिया पर चिंता जताई।

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