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तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति का बड़ा ऐलान! सिंचाई परियोजनाओं पर आंदोलन की तैयारी


भारत राष्ट्र समिति (BRS) तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन तैयार कर रही है. पार्टी ने राज्य की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं को लेकर सरकार की 'आपराधिक लापरवाही' को इस आंदोलन का आधार बनाया है. BRS अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (KCR) आज शीर्ष नेताओं के साथ रणनीति बैठक कर आंदोलन का खाका तैयार करेंगे.

इस बैठक में मौजूदा सरकार की 'किसान विरोधी नीतियों' को उजागर करने पर जोर दिया जाएगा. BRS का आरोप है कि दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं 90 फीसदी लटका दिया गया है. इसमें पलमुरु-रंगा रेड्डी लिफ्ट इरीगेशन स्कीम को संरचनात्मक समस्याओं के चलते लटका दिया गया. इसके अलावा कलेश्वरम लिफ्ट इरीगेशन प्रोजेक्ट के साथ भी यही हुआ. उन्होंने बताया कि उनके आंदोलन का केंद्र बिंदु परियोजनाएं ही होगी. BRS का आरोप है कि ये परियोजनाएं राजनीतिक कारणों से जानबूझकर ठप्प कर दी गई हैं, जबकि इससे लाखों एकड़ जमीन की सिंचाई हो सकती है.

KCR मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर 'खामोशी' को भी निशाना बनाएंगे. BRS नेतृत्व का दावा है कि कांग्रेस सरकार BRS काल में शुरू की गई योजनाओं को जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है, जिससे तेलंगाना के किसानों को नुकसान पहुंच रहा है.मेडिगड्डा बैराज की मरम्मत में लापरवाही और परियोजनाओं के लिए धनराशि रोके जाने के मुद्दे भी इस आंदोलन में प्रमुखता से उठाए जाएंगे. BRS का कहना है कि सरकार का यह रवैया राज्य के कृषि विकास के लिए गंभीर खतरा है. BRS नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इन परियोजनाओं को पुनर्जीवित नहीं किया, तो राज्यभर में बड़े पैमाने पर किसान आंदोलन शुरू हो जाएगा.

BRS शासन के दौरान शुरू की गई कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना भारत की सबसे बड़ी और सबसे महत्वाकांक्षी बहुउद्देशीय सिंचाई योजनाओं में से एक है. ये गोदावरी नदी से पानी उठाने के लिए डिज़ाइन की गई परियोजना की मदद से 18 लाख एकड़ से अधिक भूमि की सिंचाई और पेयजल और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए की गई थी. पलामुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना दक्षिणी तेलंगाना के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को संबोधित करने के लिए बीआरएस सरकार की तरफ से शुरू की गई एक और प्रमुख परियोजना है. हालांकि 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले ज़्यादातर आधार तैयार कर लिए गए थे, लेकिन नई सरकार ने सत्ता में आने के तुरंत बाद इस परियोजना को प्राथमिकता से हटा दिया.

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