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प्रयागराज: नवसंवत्सर पर कल्याणी देवी पर बराबर चल रही है राम कथा


प्रयागराज । नव संवत्सर मानस समिति के तत्वद्यान में मां कल्याणी देवी परिसर में बोलते हुए मानस मर्मज्ञ कथावाचक डॉ अनिरुद्ध जी महाराज ने बताया कि सरभंग ऋषि के आश्रम से वन की ओर बढ़ने पर रास्ते में हड्डियों का ढेर मिला। साथ चल रहे ऋषियों से भगवान राम ने उसके बारे में पूछा तो ऋषियों ने बताया कि यह राक्षसों द्वारा हत्या किए गए ऋषियों की हड्डियां हैं। निश्चिर हीन करउ महि - भुज उठाउ प्रण किंहरू - डॉ अनिरुद्ध जी , अगस्त्य मुनि के बताने पर भगवान राम दंडकारण्य में गोदावरी के तट पर (वर्तमान नासिक) स्थित पंचवटी पर जाकर वही निवास करिए । पंचवटी में राम जी ने लक्ष्मण जी को उपदेश दिया। लक्ष्य साधन, उत्तम चरित्र धर्म अधर्म में अंतर आदि की विस्तृत चर्चा किया। इसी स्थान पर वनचरी सूपर्णखा नाम की राक्षसी आ गई। सूपर्णखा ने भगवान राम से विवाह का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि मुझसे अधिक सुंदर स्त्री और  आप से सुंदर कोई पुरुष भगवान ने बनाया नहीं। इसीलिए आप मुझे स्वीकार कर ले। भगवान राम ने सूपर्णखा को लक्ष्मण से विवाह करने के लिए कहा। लक्ष्मण जी ने उसे सख्ती से मना कर दिया। 

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