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'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद के बाद टूट गई थीं अपूर्वा मखीजा, सूफी मोतीवाला बने थे सहारा


अपूर्वा मखीजा इन दिनों 'लॉक अप 2' की वजह से चर्चा में है। शो के दौरान उन्होंने उस मुश्किल दौर को याद किया जो उन्हें 'इंडियाज गॉट लेटेंट' से जुड़े बड़े विवाद के बाद झेलना पड़ा था। अपूर्वा शो में एक 'इनफॉर्मर' के तौर पर शामिल हुईं और 'लॉक अप' के कंटेस्टेंट सूफी मोतीवाला के साथ अपने मतभेद सुलझाए, जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि सूफी और अपूर्वा 'द ट्रेटर्स' शो के दौरान दोस्त बने थे। हालांकि, बाद में उनके बीच अनबन हो गई थी। इस बीच अपूर्वा मखीजा ने कहा कि आज वह सूफी की वजह से जिंदा है, जिन्होंने उनका बुरे वक्त में साथ दिया था।

'लॉक अप: सच या सजा' का घर जबरदस्त ड्रामा, तीखी बहस और अचानक आए ट्विस्ट से भरा रहा है, लेकिन हाल ही में अपूर्वा मखीजा और सूफी मोतीवाला के बीच हुई एक इमोशनल बातचीत ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शो में अपूर्वा ने 'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद के दौरान अपनी जान बचाने का श्रेय फैशन इन्फ्लुएंसर सूफी मोतीवाला को दिया। लॉक अप सीजन 2 के हालिया एपिसोड में उन्होंने समय रैना के कॉमेडी शो को लेकर हुए भारी विरोध के बाद झेलनी पड़ी मानसिक परेशानी के बारे में बात की।

अपूर्वा मखीजा ने बताया कि लोगों की नफरत ने उन्हें अपनी जान देने के कगार पर पहुंचा दिया था। इस दौरान सूफी मोतीवाला ने उनकी जान बचाई थी और उस वक्त को याद करते हुए अपूर्वा ने कहा कि उस नेगेटिविटी की वजह से उनके मन में बहुत बुरे ख्याल आने लगे थे।

अपूर्वा ने भावुक होकर सूफी मोतीवाला से कहा:


'मैंने सच में तुम्हें बहुत याद किया। अपनी मां की कसम खाकर कहती हूं, जब भी कोई मुझसे तुम्हारे बारे में पूछता है और कहता है तुम उसकी दोस्त कैसे थीं? वह तो बहुत मतलबी है तो मैं उनसे कहती हूं... 'लेटेंट' वाले विवाद के समय अगर सूफी मेरे साथ नहीं होता तो मैं खुदकुशी कर लेती। मैं उस मुश्किल दौर से नहीं निकल पाती। तुम ही अकेले इंसान थे जो मेरे साथ थे। मैं उस समय किसी को डेट भी नहीं कर रही थी। अपनी जिंदगी में एक दोस्त के तौर पर मैंने हमेशा तुम्हें इसका श्रेय दिया है। तुमने मेरी जान बचाई; अगर तुम नहीं होते तो मैं सच में 'लेटेंट' वाले मामले से उबर नहीं पाती।'


अपूर्वा की बात सुनकर सूफी भावुक हो जाता है और तुरंत उनके पुराने रिश्ते को याद करते हुए कहता है, 'ऐसा मत कहो। मैं तुम्हें सच बताता हूं, दोस्त। जब हम दोस्त थे तो वह एक साल मेरी जिंदगी का सबसे पसंदीदा साल था। मुझे आखिरकार लगा कि बॉम्बे में मेरा भी एक सोशल सर्कल है। मुझे लगा कि कोई ऐसा है जिसके पास मैं जब चाहूँ जा सकता हूं और सच कहूं तो मुझे तुम्हारी बहुत याद आई।'

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