Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

ब्रिटिश काल के मानदंडों पर न अटके रहें-सुप्रीम कोर्ट


सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह सशस्त्र बलों के जवानों की सेवा शर्तों और रिटायरमेंट की ऐज के मामले में ब्रिटिश काल के मानदंडों पर ही अटकी न रहे. कोर्ट ने कहा कि अत्यधिक कुशल तटरक्षक बलों (Indian Coast Guard) के मापदंडों पर पुनर्विचार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने पर केंद्र विचार करे.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें भारतीय तटरक्षक बल में सभी स्तर पर सेवानिवृत्ति आयु 60 साल समान रूप से लागू करने का निर्देश दिया गया था.

सीजेआई सूर्यकांत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से कहा, 'सेवा शर्तों और सेवानिवृत्ति की आयु से जुड़े इन नियमों की अब समीक्षा का समय आ गया है. सरकार ब्रिटिश दौर में बनाए गए नियमों पर अटकी नहीं रह सकती. कोई इस बात की कल्पना नहीं कर सकता कि आज के समय में तटरक्षक बल की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है. मौजूदा सेवानिवृत्ति आयु पुरानी व्यवस्था का अनुसरण करती प्रतीत होती है.'

सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के तटरक्षक (सामान्य) नियम, 1986 के नियम 20(1) और 20(2) को रद्द करने के पिछले साल के आदेश को चुनौती दी गई है. इन नियमों के तहत कमांडेंट और उससे नीचे के स्तर के अधिकारी 57 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते थे, जबकि कमांडेंट से ऊपर के स्तर के अधिकारी 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते थे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतने उन्नत और उच्च कौशल वाले बल में अनुभव का विशेष महत्व होता है और सरकार को सेवा शर्तों के मामले में अत्यधिक स्थिर या रूढ़िवादी रुख नहीं अपनाना चाहिए. कोर्ट ने आदेश दिया, 'नोटिस जारी किया जाए. इस बीच, अगली सुनवाई तक विवादित फैसले पर रोक रहेगी...जवाबी हलफनामा दो हफ्ते के अंदर दाखिल किया जा सकता है. इसके बाद दो हफ्ते में मामले को सूचीबद्ध किया जाए.'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि, हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह तटरक्षक कर्मियों की सेवा की शर्तों, खासकर भर्ती की आयु से लेकर सेवानिवृत्ति की आयु तक की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाए. इस समिति की रिपोर्ट इस अदालत में प्रस्तुत की जाए.

एएसजी अर्चना पाठक दवे की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल जैसे अन्य सुरक्षा बलों से करके त्रुटि की है. उन्होंने दलील दी कि तटरक्षक बल रक्षा मंत्रालय के अधीन एक सुरक्षा बल, जिसे समुद्र में काफी कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है और जिसके लिए अपेक्षाकृत युवा तथा पूर्णतः चिकित्सकीय रूप से सक्षमकर्मियों की आवश्यकता होती है.

अर्चना पाठक दवे ने यह भी दलील रखी कि रिटायरमेंट ऐज को भर्ती आयु से जोड़कर एक निश्चित सेवा अवधि सुनिश्चित की जाती है और यह नीति का विषय है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया गया तो अन्य रक्षा सेवाओं में भी इसी तरह की मांगें उठ सकती हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 नवंबर को अपने आदेश में कहा था कि तटरक्षक बल में अलग-अलग स्तर के लिए अलग सेवानिवृत्ति आयु तय करने के पीछे कोई तर्कसंगत आधार नहीं है और यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती है. अदालत ने नियम 20(1) और 20(2) को असंवैधानिक ठहराते हुए 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु सभी पदों के लिये समान रूप से लागू करने का निर्देश दिया था. तटरक्षक बल के सेवानिवृत्त अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया गया था.

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |