इस योजना को जारी रखने का मार्ग प्रशस्त करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने राज्य सरकार की अपील पर हाईकोर्ट में पेश हुए याचिकाकर्ताओं सहित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए. राज्य सरकार की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ताओं को एक भी पैसा नहीं दिया गया है.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रथम दृष्टया, अगर राज्य सरकार जमीनी स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव का आकलन करने में सरकारी कर्मचारियों की मदद लेती है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. प्रतिवादियों के वकील ने आरोप लगाया था कि सरकार चुनाव से पहले जनसंपर्क गतिविधियों के लिए अपने कर्मचारियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद ले रही है.
हाईकोर्ट ने 17 फरवरी को नव केरल नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम के लिए 20 करोड़ रुपये अधिकृत करने वाले सरकारी आदेश को रद्द कर दिया था और इसे कार्यकारी शक्ति का दुरुपयोग और नियमों का उल्लंघन करार दिया था. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन की अध्यक्षता वाली बेंच ने चिंता जताई थी कि विभागों को बजट आवंटन का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है.
अदालत ने यह भी कहा था कि इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि मंत्रिमंडल के निर्णय और इस संबंध में सरकारी आदेश से काफी पहले माकपा के राज्य सचिव एमवी गोविंदन की ओर से पार्टी से जुड़े लोगों को कार्यक्रम में भाग लेने और सामाजिक स्वयंसेवक बल पोर्टल पर पंजीकरण कराने का आह्वान करते हुए पत्र कैसे जारी किया गया.
हाईकोर्ट ने कोच्चि निवासी मुबास एमएच और केरल छात्र संघ (KSU) की राज्य इकाई के अध्यक्ष अलोशियस जेवियर की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की थी. याचिका में कार्यक्रम और निधि आवंटन को चुनौती दी गई थी.
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सरकार सत्ताधारी दल या गठबंधन के निजी और राजनीतिक लाभ के लिए सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कर रही है. बेंच ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा था कि यह कार्यक्रम पहले नहीं चलाया गया और ऐसे समय में शुरू किया गया जब विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा होने वाली है.
