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दिल्ली में प्रदूषण! सिर्फ गरीब नहीं अमीरों का भी ख्याल रखा जाए-सुप्रीम कोर्ट


दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई और कहा कि वह सिर्फ वही निर्देश लागू करेगा, जिनका पालन किया जा सके क्योंकि इसका सबसे ज्यादा असर गरीबों पर देखने को मिलेगा. कोर्ट ने कहा कि अदालत को सिर्फ वही दिशा-निर्देश पारित करने चाहिए, जो लागू करने लायक हों.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचौली की बेंच मामले के सामने सोमवार (15 दिसंबर, 2025) को एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए उपाय मौजूद हैं, लेकिन मुद्दा ये है कि अधिकारी उनका खराब कर्यान्वयन कर रहे हैं.

अपराजिता सिंह ने कहा कि जब तक कोर्ट कोई निर्देश नहीं देता, तब तक अधिकारी पहले से मौजूद प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते हैं. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'बुधवार को मामला सुनवाई पर लगेगा, तीन जजों की बेंच इस पर सुनवाई करेगी और हम वही आदेश देंगे जो लागू हो सकें.'

सीजेआई सूर्यकांत ने अपराजिता सिंह की दलीलों पर कहा, 'अगर दिक्कतें आ रही हैं तो इसका क्या हल है और क्या निर्देश दिए जाएं, हम सिर्फ वही निर्देश देंगें. अगर हम कोई आदेश पारित करेंगे तो हो सकता है वो कहें कि हम इनका पालन करने में असमर्थ हैं या वे इसकी गंभीरता को नहीं समझेंगे. हमें दोनों समस्याओं का हल ढूंढना पड़ेगा. कुछ निर्देश हैं, जिनको बलपूर्वक लागू करवाया जा सकता है. लोगों को उन परिस्थितियों के अनुसार ढलना होगा. उन्हें अपना लाइफस्टाइल बदलना होगा, लेकिन बड़े शहरों में लोगों का अपना लाइफस्टाइल है, जिसे बदलना मुश्किल है.'

सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर भी चिंता जताई कि इन निर्देशों का गरीबों पर क्या असर पड़ता है, वो भी देखना होगा. एमिकस ने कोर्ट को बताया कि सबसे ज्यादा गरीब ही प्रभावित होते हैं. ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP)-4 पाबंदी लगने से कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने वाले मजदूरों के पास काम नहीं है.

एक अन्य वकील ने बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे से जुड़े एक आवेदन का हवाला देते हुए कहा कि पहले के आदेशों के बावजूद स्कूल बाहरी खेल गतिविधियों का आयोजन कर रहे हैं. एमिकस क्यूरी ने यह भी कहा, 'इस अदालत के आदेश के बावजूद स्कूलों ने इन खेल गतिविधियों को आयोजित करने के तरीके खोज लिए हैं... ये गतिविधियां हो रही हैं. सीएक्यूएम (CAQM) एक बार फिर इस अदालत के आदेश का हवाला दे रहा है.'

सोमवार को दिल्ली घनी धुंध की चादर में लिपटी रही, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 498 पर पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है. एक्यूआई 38 केंद्रों पर गंभीर था, जबकि दो केंद्रों पर यह बेहद खराब था. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वायु प्रदूषण के खिलाफ दायर याचिका को सामान्य मामला नहीं माना जा सकता, जिसे सिर्फ सर्दियों के महीनों में ही सूचीबद्ध किया जाए. कोर्ट ने कहा था कि इस समस्या के अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान खोजने के लिए महीने में दो बार मामले की सुनवाई की जाएगी.

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