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एयरपोर्ट पर व्हीलचेयर इस्तेमाल करने के नियमों में होगा बदलाव


भारत के प्रमुख हवाई अड्डों पर व्हीलचेयर की डिमांड में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है। खासतौर पर अमेरिका और UK जाने वाली फ्लाइट्स में हर तीसरा पैसेंजर व्हीलचेयर असिस्टेंस मांग रहा है। हालांकि, इस बढ़ती डिमांड के पीछे कुछ पैसेंजर्स की वास्तविक जरूरत है, तो कुछ इसे लंबी लाइनों से बचने और जल्दी बोर्डिंग के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सरकार इस दुरुपयोग को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देशों को संशोधित करने की तैयारी कर रही है, ताकि वास्तविक जरूरतमंद लोग फंसे न रहें।

रिपोर्ट के अनुसार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) वर्तमान में एक नए ढांचे को अंतिम रूप दे रहा है, जिसे मई के अंत तक लागू किए जाने की उम्मीद है। आने वाली पॉलिसी के तहत, फ्री व्हीलचेयर सेर्विस 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के यात्रियों तक सीमित हो सकती हैं, जबकि कम उम्र के यात्रियों को वैध मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाना आवश्यक हो सकता है। वहीं, बोर्डिंग गेट तक व्हीलचेयर की मदद चाहने वाले यात्रियों से मामूली शुल्क लेने की भी योजना है।
संभावित समाधान/मिसयूज रोकने के उपाय-
आयु सीमा: व्हीलचेयर असिस्टेंस के लिए एक उम्र सीमा तय करने का भी सुझाव है। केवल 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग ही फ्री व्हीलचेयर सुविधा के लिए स्वतः पात्र होंगे।
मेडिकल प्रूफ: अगर कम उम्र के पैसेंजर्स व्हीलचेयर असिस्टेंस की मांग करते हैं, तो एयरलाइंस उनसे मेडिकल डॉक्यूमेंटेशन मांग सकती है।
कार्ट सर्विस: एयरपोर्ट्स पर बग्गी या कार्ट सर्विस शुरू की जा सकती है जिससे बुजुर्ग यात्रियों को लंबी दूरी तक चलने की जरूरत न पड़े।
सशुल्क सहायता: उन लोगों के लिए कम लागत वाला विकल्प पेश किया जा सकता है जो मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं लेकिन उन्हें व्हीलचेयर की जरूरत है।
यात्रियों की जिम्मेदारी- यात्रियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे व्हीलचेयर असिस्टेंस का सही इस्तेमाल करें। ये सुविधा उन लोगों के लिए है, जिनके लिए एयरपोर्ट पर चलना मुश्किल है, न कि उन लोगों के लिए जो बस जल्दी बोर्डिंग या इमिग्रेशन लाइन से बचना चाहते हैं।

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