पीलीभीत। विकासखंड मरौरी के चर्चित बाबू पर अवकाश अवधि के दौरान सरकारी भुगतान किए जाने के आरोपों की जांच अब निर्धारित समय-सीमा से आगे निकल चुकी है। जिलाधिकारी द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को जांच सौंपते हुए तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तय अवधि समाप्त होने के बाद भी रिपोर्ट प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सकी है।मामला सामने आने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी कर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। हालांकि, समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद रिपोर्ट लंबित रहने से मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि जांच के लिए जिला परियोजना निदेशक को नामित किया गया है। उनके अनुसार जांच प्रक्रिया जारी है और रिपोर्ट शीघ्र ही प्रस्तुत कर दी जाएगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि रिपोर्ट में देरी किन कारणों से हुई और अब इसे कब तक सौंपा जाएगा।उधर, प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी यह सवाल उठने लगा है कि जब जिलाधिकारी स्वयं किसी मामले में समय-सीमा तय करते हैं, तब भी उसका पालन क्यों नहीं हो पाता। लोगों का कहना है कि यदि निर्धारित अवधि में जांच पूरी नहीं होती तो समय-सीमा तय करने का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है।फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि रिपोर्ट में देरी केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। इसका स्पष्ट जवाब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मिल सकेगा। तब यह भी स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोप सही पाए गए या नहीं तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता मिली तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी।
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