गालीबाज छात्रों को सामुदायिक सेवा करने का आदेश दें-सुप्रीम कोर्ट
August 03, 2026
एयरफोर्स के रिटायर्ड अफसर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि जिन छात्रों ने सोशल मीडिया पर गाली दी है, उन्हें सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट भी इस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इस मामले को बुधवार के दिन सुना जाएगा। एयरफोर्स के एक रिटायर्ड अफसर ने जंतर-मंतर पर हुई घटना का हवाला दिया और आयोजकों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
दिल्ली के जंतर-मंतर में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी की अगुआई में छात्रों ने संसद मार्च किया था। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोल छोड़े थे। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने भी पथराव किया था। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई थीं। बाद में कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के लाठीचार्ज को लेकर सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा निकाला और जमकर गाली-गलौज की।
प्रदर्शनकारी युवाओं ने पीएम मोदी के लिए भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ था। वीडियो वायरल होने के बाद गाली देने वाली लड़की के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। मामला बढ़ने पर लड़की ने बताया कि उसकी उम्र 15 साल है और उसने दूसरों के उकसावे में आकर पीएम मोदी को अपशब्द कहे थे। लड़की ने वीडियो जारी कर पूरे देश से माफी मांगी थी। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लड़की को जमकर ट्रोल किया गया था, क्योंकि उसने पीएम मोदी की दिवंगत मां के लिए भी अपशब्द कहे थे। कई अन्य युवाओं के वीडियो भी सामने आए थे, जिनमें वह गाली-गलौज करते देखे जा सकते थे। कई छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान भी अभद्र नारे लगाए थे।
गाली-गलौज करने वाली लड़की के माफी मांगने के बाद पीएम मोदी ने भी वीडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने देश की बेटियों के अपशब्दों के इस्तेमाल पर चिंता जताई और कहा कि उन्हें सही दिशा में ले जाने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने गाली देने वाले युवाओं को माफ करने की बात कही थी। बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने भी कहा था कि हमारी बेटियां इतनी आसानी से कैसे बहक जाती हैं। हालांकि, अब छात्रों के गाली देने का मामला कोर्ट पहुंच चुका है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी कर सकता है।
