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रुद्रपुर: अगस्त क्रांति की 83वीं बरसी पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा का प्रदर्शन, चार श्रम संहिताएं वापस लेने की मांग


रुद्रपुर । अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की 83वीं वर्षगांठ पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने आंबेडकर पार्क में प्रदर्शन कर केंद्र और राज्य सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने ‘कॉरपोरेट फासीवादी गुलामी’ से मुक्ति का आह्वान करते हुए मजदूर-किसान, छात्र और युवाओं को व्यापक जन आंदोलन के लिए एकजुट होने की अपील की।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र की मोदी सरकार पर सार्वजनिक संस्थानों को निजी हाथों में सौंपने और कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रेल, बैंक, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और सड़क सहित विभिन्न क्षेत्रों में निजीकरण की नीतियां आम जनता और श्रमिकों के हितों के विपरीत हैं। वक्ताओं ने सरकार पर अल्पसंख्यकों के प्रति घृणा और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।

वक्ताओं ने कहा कि देश के श्रम कानूनों, कृषि कानूनों, आपराधिक कानूनों और संविधान में किए जा रहे बदलावों से श्रमिकों, किसानों, आदिवासियों, छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने चार श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें समाप्त करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं लागू की गई हैं। आरोप लगाया कि इनसे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे और यूनियन बनाने तथा अपने हितों के लिए संघर्ष करने की क्षमता प्रभावित होगी। वक्ताओं ने उत्तराखंड सरकार द्वारा हाल में चारों श्रम संहिताओं को अधिनियमित किए जाने का भी विरोध किया।

सभा में अमेरिका के साथ प्रस्तावित विदेशी व्यापार समझौतों का विरोध करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ऐसे समझौतों से देश के किसानों और कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने किसानों की फसलों के लिए सी2़50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान चार श्रम संहिताओं को समाप्त करने, अमेरिका के साथ एफटीए समझौते रद्द करने, न्यूनतम वेतन 42 हजार रुपये करने, सभी श्रमिकों को पीएफ-ईएसआई के दायरे में लाने, किसानों को सी2़50 प्रतिशत के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने तथा दमनकारी कानूनों को वापस लेने की मांग की गई।

वक्ताओं ने अगस्त क्रांति के इतिहास से प्रेरणा लेते हुए मजदूरों, किसानों, छात्रों और युवाओं के व्यापक आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया। साथ ही रांची में आइसा नेता कॉमरेड नेहा पर कथित हमले की निंदा करते हुए उनके प्रति एकजुटता व्यक्त की।

सभा में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, सीएसटीयू के केंद्रीय महासचिव मुकुल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव कैलाश भट्ट, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान के दिनेश चंद, ऐक्टू की जिला सचिव अनीता अन्ना, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय महासचिव नरेश नौटियाल, समाजवादी लोक मंच के गिरीश आर्या, बैंक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष समीर राय, आइसा के प्रदेश सचिव धीरज कुमार, भाकपा (माले) के रंजन विश्वास, नारायण महाजन, विजय शर्मा, केहरी सिंह, बजाज ऑटो लिमिटेड के संदीप कुमार, पंजाब बेबल्स इम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, भगवती इम्प्लाइज यूनियन के लोकेश पाठक, प्रमोद फुलारा और सूरज बोरा सहित अन्य मौजूद रहे।।

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