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ट्रैफिक पुलिस ने देर रात रोकी पूर्व मेजर की गाड़ी, फैमिली के साथ बदतमीजी करने का आरोप


कारगिल और कश्मीर जैसी दुर्गम जगहों पर देश की सेवा कर चुके भारतीय सेना के एक पूर्व मेजर ने गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं। आरोप है कि शराब की जांच के दौरान उनके साथ न सिर्फ अभद्रता की गई, बल्कि इस्तेमाल की हुई गंदी पाइप से उनका ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट कराया गया। यह पूरा वाकया गुरुग्राम के मशहूर साइबर हब के पास का है। देर रात चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने कारगिल और कश्मीर में देश की रक्षा कर चुके पूर्व।

पूर्व सैन्य अधिकारी का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें शराब की जांच के लिए जो ब्रीथ एनालाइजर दिया, उसमें लगी पाइप पहले से इस्तेमाल की हुई और बेहद गंदी थी। जब उन्होंने इस गंदी पाइप से फूंक मारी, तो मशीन में अल्कोहल का लेवल 91 MG दिखाई दिया। पूर्व मेजर ने तुरंत इस पर आपत्ति जताई और नई, साफ पाइप से दोबारा जांच करने की मांग की।

हैरान करने वाली बात यह है कि जब नई पाइप लगाकर दोबारा टेस्ट किया गया, तो रीडिंग घटकर महज 13 MG रह गई, जो कि तय सीमा के अंदर है। पूर्व सैन्य अधिकारी का आरोप यहीं खत्म नहीं होता। उनका दावा है कि जब उन्होंने इस धांधली का विरोध किया और अपने फोन से वीडियो बनाने की कोशिश की, तो मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर और पुलिसकर्मियों ने उनसे उनका मोबाइल छीन लिया। इतना ही नहीं, देश के लिए जान की बाजी लगाने वाले पूर्व मेजर को उनकी पत्नी और दो बेटियों के सामने देर रात तक सड़क पर प्रताड़ित और परेशान किया गया। जब पीड़ित परिवार ने मदद के लिए आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल किया, तो पुलिस की पीसीआर वैन आने से पहले ही आरोपी ट्रैफिक पुलिस की टीम मौके से रफूचक्कर हो गई।

इस पूरे मामले के बाद पूर्व सैन्य अधिकारी ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर से लिखित शिकायत की है। उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए मांग की है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बॉडी वॉर्न कैमरा फुटेज और ब्रीथ एनालाइजर के डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की जाए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इस मामले पर अब प्रशासन भी हरकत में आ गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीसीपी ट्रैफिक ने मामले की जांच एसीपी ट्रैफिक को सौंप दी है।

पुलिस का कहना है कि ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों के बॉडी वॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग को खंगाला जा रहा है और अगर कोई भी दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली और आम जनता के साथ उनके व्यवहार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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