भांवरकोल/गाजीपुर। पूर्वांचल के गाजीपुर, बलिया तथा बिहार के बक्सर और भोजपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में प्रचलित प्राचीन कृषि-सांस्कृतिक परंपरा दसुआ (दस तारिका) सोमवार रात्रि से प्रारंभ होगी। यह परंपरा अगले 10 दिनों तक चलेगी, जिसके दौरान भूमि से जुड़े कार्यों को वर्जित माना जाता है।
लोक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में धरती माता रजस्वला होती हैं, इसलिए खेतों में हल चलाना, खुदाई करना, मेड़ बनाना तथा अन्य कृषि कार्य नहीं किए जाते। ग्रामीण समाज आज भी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस परंपरा का पालन करता है।
जानकारों के अनुसार (दसुआ) केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि प्रकृति और कृषि के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह परंपरा भूमि को विश्राम देकर उसकी उर्वरता और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने का संदेश देती है। ग्रामीण अंचलों में आज भी इसके प्रति विशेष आस्था देखने को मिलती है।
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