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कमला पसंद का खेल, पूरी सत्ता फेल! पाऊच पर खतरा लिखों और मौत का सामान बेंचों


  • सुप्रीम कोर्ट,जीएसटी,इनकम टैक्स,पुलिस आरटीओ अनजान 
  • लोकप्रिय मुख्यमंत्री भी कैंसर से अनजान प्रत्येक वर्ष जाति है सैकड़ों जान 
  • कमला पसंद के रूप में खुलेआम बिकते मौत के पाऊच पर प्रतिबंध कब?
  • पाऊच पर खतरा लिखें, टैक्स चोरी कर माननीय एमएलसी बनें! कब जागेगी सरकार?

विधान केसरी विशेष खोजी रिपोर्ट

लखनऊ(विशेष ब्यूरो)। यह उत्तर प्रदेश के औद्योगिक गलियारों से लेकर सत्ता के शीर्ष तक चल रहे एक बेहद घिनौने और सफेदपोश सिंडिकेट की कड़वी हकीकत बन चुका है। 'कमला पसंद के रूप में खुलेआम बिकती मौत के पाऊच पर प्रतिबंध कब लगेगा?' यह तीखा सवाल उठाते हुए 'विधान केसरी' के संपादक एवं 'जन सेवा दल' के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनेश ठाकुर ने जनस्वास्थ्य को कैंसर की भट्टी में झोंकने और सरकारी खजाने को अरबों रुपये का चूना लगाने वाले रसूखदार तंत्र के खिलाफ बड़े आंदोलन का शंखनाद किया है। उन्होंने सीधे देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) से इस खूनी खेल पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने का अनुरोध किया है, जहां कानून की नाक के नीचे एक समानांतर अर्थव्यवस्था चलाई जा रही है। कमला पसंद समूह जैसी दिग्गज कॉर्पोरेट लॉबी द्वारा शेल कंपनियों के जरिए टैक्स की भारी हेराफेरी की जा रही है, और इस पूरे 'मौत के कारोबार' को पर्दे के पीछे से मिल रहे ऊंचे राजनीतिक व प्रशासनिक संरक्षण ने पूरी व्यवस्था की साख पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

देश में जनस्वास्थ्य और सरकारी राजस्व को एक साथ खोखला करने वाले इस सफेदपोश सिंडिकेट का भंडाफोड़ विभागीय आंकड़ों के विश्लेषण से हुआ है। एक तरफ जहां 'कमला पसंद' जैसे नामी ब्रांड्स समाज के युवाओं को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की गर्त में धकेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ फर्जी और शेल (Shell) कंपनियों का एक जटिल वित्तीय मायाजाल बुनकर सरकार को अरबों रुपये के जीएसटी (GST) और आयकर का चूना लगाया जा रहा है। जांच एजेंसियों के इनपुट्स और खोजी रिपोर्टों से मिले संकेत साफ तौर पर बताते हैं कि यह महज कोई सामान्य व्यापार नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और जनता की जिंदगी के खिलाफ खेला जा रहा एक सुनियोजित और खूनी खेल है।

​स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ के पूरे तंत्र को 'मौत का कानूनी कारोबार' कहना ही सबसे सटीक होगा। चिकित्सा विज्ञान के सरकारी और वैश्विक रिकॉर्ड्स इस बात की बार-बार पुष्टि कर चुके हैं कि पान मसाले में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक घटक—जैसे अत्यधिक मात्रा में कत्था, प्रतिबंधित निकोटिन, घटिया चूना और जानलेवा कृत्रिम सुगंध (Chemical Flavours)—मानव शरीर के लिए सीधे धीमे जहर की तरह काम करते हैं। यही कारण है कि आज समाज में मुंह का कैंसर (Oral Cancer) और ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (मुंह का पूरी तरह न खुल पाना) जैसी अत्यंत पीड़ादायक बीमारियां महामारी की तरह पैर पसार रही हैं। स्वयं खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सख्त नियमों के कारण इन कंपनियों को पैकेटों पर "कैंसर होने" की वैधानिक चेतावनी छापनी पड़ती है। पैकेट पर छपी यह चेतावनी ही इस बात का सबसे बड़ा और अकाट्य सरकारी प्रमाण है कि यह उत्पाद पूरी तरह जानलेवा है। लेकिन विडंबना देखिए कि जनहित और सुशासन के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकारें, तंबाकू और पान मसाला लॉबी के इसी रसूख और आर्थिक साम्राज्य के आगे पूरी तरह असहाय और नतमस्तक नजर आ रही हैं।


आर्थिक मोर्चे पर इस सिंडिकेट का खेल और भी ज्यादा खतरनाक और गहरी जड़ों वाला है। राजस्व का बड़ा नुकसान करने और अपनी काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए इस समूह द्वारा 'के.पी. पेन्सिल्स' और 'कमला कंज्यूमर केयर' जैसी कई सहयोगी कंपनियों का एक समानांतर नेटवर्क खड़ा किया गया है। महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) और आयकर विभाग की विभिन्न कार्यवाहियों और छापों से यह स्पष्ट हो चुका है कि ये समूह बिना बिल के माल की अवैध और गुप्त सप्लाई (Under-reporting) करने तथा फर्जी कागजी कंपनियों के जरिए करोड़ों के काले धन को सफेद (Funds Diversion) करने के खेल में पूरी तरह लिप्त हैं। जनता की गाढ़ी कमाई और देश के विकास में लगने वाले टैक्स की सरेआम चोरी करके ये कॉर्पोरेट घराने अपनी तिजोरियां भर रहे हैं और अपनी इसी अकूत दौलत के दम पर सत्ता के गलियारों में ऊंचे राजनीतिक पद और रसूख हासिल कर लेते हैं। देश के विकास में लगने वाला सरकारी राजस्व आज इन सफेदपोश 'माफियाओं' के व्यक्तिगत ऐशो-आराम और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ रहा है।

​विधान केसरी के संपादक एवं जन सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनेश ठाकुर ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) और अनुच्छेद 47 (जनस्वास्थ्य में सुधार करना राज्य का प्राथमिक कर्तव्य) का हवाला देते हुए सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के जीवन की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक कर्तव्य है, लेकिन जब प्रशासनिक तंत्र ही मौन हो जाए, तो देश की न्यायपालिका को आगे आना होगा। उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट से इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय न्यायिक जांच या केंद्रीय एजेंसी (CBI/ED) से समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही, राजस्व के तात्कालिक लालच को छोड़कर जनस्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए, इन जानलेवा उत्पादों के निर्माण, भ्रामक विज्ञापनों और बिक्री पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में तत्काल कड़े कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक मिलीभगत या राजनीतिक रसूख के कारण टैक्स चोरी और प्रतिबंधित रसायनों का यह खूनी खेल यूं ही अनवरत जारी रहता है, तो देश की जनता 'जन सेवा दल' के नेतृत्व में आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से इस व्यवस्था को इसका करारा जवाब देगी, जिसकी सीधी और पूरी जिम्मेदारी वर्तमान शासन की होगी।

​जन सेवा दल एवं विधान केसरी की जनता से महा-अपील: आगे आएं और शिकायत दर्ज करें!

​इस सफेदपोश सिंडिकेट और मौत के कारोबार को उखाड़ फेंकने के लिए केवल पत्रकारिता काफी नहीं है, इसमें जन-भागीदारी की सख्त जरूरत है। विनेश ठाकुर ने देश और प्रदेश की जनता, युवाओं और जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे नीचे दिए गए आधिकारिक सरकारी मंचों और सोशल मीडिया हैंडल्स पर इस सिंडिकेट के खिलाफ सीधे अपनी शिकायत दर्ज कराएं और इस मुहिम को एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन बनाएं:

​टैक्स चोरी, वित्तीय सिंडिकेट और शेल कंपनियों की शिकायत हेतु (GST / Income Tax):

​CBIC (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड): इनके आधिकारिक X (Twitter) हैंडल @cbic_india पर सीधे ट्वीट कर इस टैक्स चोरी सिंडिकेट को उजागर करें और जांच की मांग करें।

​Income Tax India (आयकर विभाग - काला धन विंग): इनके X (Twitter) हैंडल @IncomeTaxIndia पर शेल कंपनियों और वित्तीय हेराफेरी के खिलाफ ट्वीट करें।

​आयकर विभाग आधिकारिक शिकायत पोर्टल: Income Tax e-Filing Portal पर जाकर "Tax Evasion Petition" के तहत गुप्त रूप से कर चोरी की विस्तृत जानकारी और इस रिपोर्ट की कॉपी दर्ज कराएं।

​स्वास्थ्य से खिलवाड़, कैंसरकारी तत्वों और प्रतिबंधित रसायनों की शिकायत हेतु (FSSAI / Health Dept.):

​FSSAI India (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण): इनके X (Twitter) हैंडल @fssaiindia पर उत्पाद के हानिकारक और जानलेवा केमिकल फ्लेवर्स को लेकर सीधे शिकायत पोस्ट करें।

​FoSCoS फूड सेफ्टी कनेक्ट पोर्टल: सीधे आधिकारिक पोर्टल FoSCoS Connect पर जाकर जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले इस पान मसाला ब्रांड के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।

​FSDA Uttar Pradesh (यूपी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन): उत्तर प्रदेश के स्थानीय स्तर पर तुरंत सैंपल लेने और छापेमारी की कार्यवाही के लिए इनके X (Twitter) हैंडल @fsdaup को टैग करते हुए शिकायत पोस्ट करें।

"जब तक जनता खुद जागकर इन भ्रष्ट तंत्रों और मौत के सौदागरों के खिलाफ आवाज नहीं उठाएगी, तब तक यह सफेदपोश सिंडिकेट हमारे बच्चों का भविष्य और देश का राजस्व दोनों लीलता रहेगा। उठिए, ट्वीट कीजिए, शिकायत दर्ज कराइए और इस मुहिम का हिस्सा बनिए!" — विनेश ठाकुर


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