वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कल्याण बनर्जी को कोई चोट नहीं लगी है और वह केवल ड्रामा कर रहे हैं.
बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कल्याण बनर्जी को कोई चोट नहीं लगी है और वह जानबूझकर राजनीतिक सहानुभूति लेने के लिए “ड्रामा” कर रहे हैं. पार्टी का आरोप है कि वे अभिषेक बनर्जी से जुड़े मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.
देबजीत सरकार ने कहा, "टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को अगली बार अपना ड्रामा बेहतर तरीके से रिहर्सल करना चाहिए. वे दावा करते हैं कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन्हें मारा, लेकिन तुरंत बाद वे नाटकीय तरीके से जमीन पर गिर जाते हैं, जबकि उनका फोन अभी भी कान से लगा हुआ है और वे बिना किसी रुकावट के कॉल पर बातचीत करते रहते हैं.
जानकारी के मुताबिक, कल्याण बनर्जी चंडीटला थाने में ज्ञापन देने पहुंचे थे. वे अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले और गिरफ्तार टीएमसी कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग कर रहे थे. इसी दौरान ज्ञापन सौंपने से पहले ही टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नारेबाजी शुरू हो गई.
बताया गया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने टीएमसी समर्थकों के खिलाफ “चोर-चोर” के नारे लगाए, जिसके बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती की गई. इसी दौरान किसी ने कल्याण बनर्जी पर गेंद या पत्थर जैसी वस्तु से हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में चोट लगने की बात कही गई है.
सिर पर भीगा हुआ रूमाल रखकर कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि चंडीटला थाने में ज्ञापन देने जाते समय उन पर हमला किया गया. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने जा रहे लोगों पर हमला किया जाना बेहद गंभीर है और यह पूरी तरह निंदनीय है.
गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे. इसी दौरान कथित रूप से उन पर भीड़ ने हमला कर दिया. घटना के बाद पूरे राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया और टीएमसी तथा भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया.
