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चौंकाने वाला खुलासा! बिहार में अपात्र नाबालिगों को पक्के मकान, लाखों रुपये का भुगतान भी हुआ


भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन में अनियमितताओं को रेखांकित किया है। रिपोर्ट में नाबालिगों को पक्के मकान स्वीकृत करने से लेकर दिल्ली और झारखंड में स्थित घरों की जियो-टैगिंग किए जाने जैसे मामलों का उल्लेख है। यह रिपोर्ट गुरुवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'नमूना जिलों के अभिलेखों की जांच के दौरान लेखा परीक्षा में अपात्र लाभार्थियों को आवास स्वीकृत करने के मामले सामने आए। पीएमएवाई-जी में नाबालिगों के नाम पर आवास पंजीकरण/स्वीकृति का कोई प्रावधान नहीं है।'

इसमें कहा गया, 'केंद्र सरकार ने सितंबर 2017 में स्पष्ट किया था कि यदि पति-पत्नी दोनों की मृत्यु हो गई हो तो सूची में प्रदर्शित नाबालिग बच्चे के नाम पर अभिभावक या प्रखंड/पंचायत अधिकारी के साथ संयुक्त रूप से सत्यापन के बाद आवास स्वीकृत किया जा सकता है। हालांकि, लेखा परीक्षा में नाबालिग लाभार्थियों के चार मामले पाए गए।'

रिपोर्ट के अनुसार, दो मामलों में नाबालिगों को उनके माता-पिता के जीवित रहते हुए ही अनियमित रूप से आवास स्वीकृत किए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि उनकी पात्रता का समुचित सत्यापन नहीं किया गया।

इन दो अपात्र नाबालिग लाभार्थियों को 2.50 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया। जियो-टैगिंग में विसंगतियों के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है, 'लेखा परीक्षा में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें घरों की जियो-टैगिंग उनके वास्तविक भौगोलिक स्थान, संबंधित जिले या यहां तक कि राज्य के बाहर की गई। 52 मामलों में घरों की लोकेशन राज्य के भीतर वास्तविक स्थान से काफी दूर दर्ज की गई। तीन मामलों में घरों की जियो-टैगिंग राज्य के बाहर दिल्ली और झारखंड में की गई, जिनकी दूरी 51 किलोमीटर से लेकर 915 किलोमीटर तक पाई गई।'

बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) की शुरुआत जून 2015 में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा की गई थी। यह ग्रामीण गरीबों को किफायती आवास उपलब्ध कराने की एक प्रमुख योजना है। इस योजना के तहत कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों को स्वच्छ रसोई सहित बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के मकान उपलब्ध कराए जाते हैं।

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